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Fisheries: प्रोडक्ट ब्रांडिंग और स्मार्ट पैकेजिंग जैसे कामों से भी फिशरीज सेक्टर में कर सकते हैं ग्रोथ

युवाओं को फिशरीज में बिजनेस की जानकारी देते एक्सपर्ट.

नई दिल्ली. नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ एग्रीकल्चरल एक्सटेंशन मैनेजमेंट (MANAGE) फिशरीज इनोवेशन एंड स्टार्टअप हब (FISHub), हैदराबाद ने कॉलेज ऑफ फिशरीज, गुरु अंगद देव वेटरनरी एंड एनिमल साइंसेज यूनिवर्सिटी के सहयोग से फिशरीज एंटरप्रेन्योरशिप डेवलपमेंट (FED) प्रोग्राम “एक्वा युवा” (Aqua Yuva) का आयोजन किया. इसका मकसद उभरते हुए फिशरीज प्रोफेशनल्स और युवा फिशरीज उत्साही लोगों को इनलैंड फिशरीज सेक्टर में मौजूद अलग-अलग एंटरप्रेन्योरशिप के मौकों के बारे में बताना था. 50 लोगों के समूह को फिशरीज सेक्टर में कैसे आगे बढ़ा जा सकता है, इसके बारे में जानकारी दी गई.

कार्यक्रम में MANAGE के डायरेक्टर (एग्रीकल्चरल एक्सटेंशन) और MANAGE-FISHub के CEO डॉ. सरवनन राज ने “एक्वा युवा” FED प्रोग्राम के उद्देश्यों और युवाओं में एंटरप्रेन्योरशिप को बढ़ावा देने में इसकी भूमिका के बारे में जानकारी दी. उन्होंने प्रतिभागियों को FISHub के उन दूसरे प्रोग्राम्स के बारे में भी बताया जो इनोवेटिव स्टार्टअप और एंटरप्रेन्योरशिप आइडियाज को सफल बिजनेस मॉडल में बदलने के लिए रियल-टाइम नेटवर्किंग और सहयोग विकसित करने के लिए बनाए गए हैं.

ज्यादा युवाओं को एंटरप्रेन्योरशिप के जरिए आत्मनिर्भर बनाया जाए
“फार्म टू फोर्क” (खेत से थाली तक) फिशरीज वैल्यू चेन में एंटरप्रेन्योरशिप के शानदार विकल्पों के बारे में जानने के अलावा, प्रतिभागियों ने मौका, जरूरत, टेक्नोलॉजी, भौगोलिक, सामाजिक, महिला और ग्रामीण-आधारित एंटरप्रेन्योरशिप प्रस्ताव विकसित करने के लिए खास ग्रुप लर्निंग एक्टिविटीज में भी हिस्सा लिया.

उन्होंने फिश वैल्यू चेन में एंटरप्रेन्योरशिप डेवलपमेंट के संभावित क्षेत्रों को समझने के लिए मौजूदा डिमांड-सप्लाई चेन, मुख्य कमियों और संभावित विकास का मूल्यांकन करने के लिए असेसमेंट टास्क में भी भाग लिया.

प्रोडक्ट ब्रांडिंग, स्मार्ट पैकेजिंग और नए प्रमोशन मॉडल पर ग्रुप एक्टिविटी से नए मार्केटिंग आइडियाज सामने आए.

एंटरप्रेन्योरशिप माइंडसेट डेवलपमेंट, इनलैंड फिशरीज रिसोर्सेज और विकास की भविष्य की गुंजाइश, बिजनेस मॉडल कैनवस के बारे में बताया गया.

साथ ही बिजनेस प्लान तैयार करने पर एक्सपर्ट्स की बातचीत ने युवा दिमागों में आत्मनिर्भरता के लिए आत्मविश्वास की चिंगारी जगाई.

यहां मौजूद लोगों को संबोधित करते हुए, डायरेक्टर एक्सटेंशन एजुकेशन डॉ. आरएस ग्रेवाल ने जोर दिया कि ज्यादा से ज्यादा युवाओं को एंटरप्रेन्योरशिप के जरिए आत्मनिर्भर बनाया जाए.

साथ ही नौकरियां पैदा करने और राज्य व देश के सामाजिक-आर्थिक विकास में योगदान देने के लिए आगे आना चाहिए.

भविष्य एंटरप्रेन्योरशिप और नए स्टार्टअप्स का है, इस बात पर रोशनी डालते हुए उन्होंने प्रतिभागियों को आधुनिक फिशरीज-आधारित या उससे जुड़े उद्यम स्थापित की सलाह दी.

साथ ही लीक से हटकर एक मजबूत मल्टी-डायमेंशनल नेटवर्क विकसित करने के लिए गाइड किया.

बताते चलें कि फिशरीज एंटरप्रेन्योरशिप डेवलपमेंट के जरिए मछली पालन और उससे जुड़े क्षेत्रों में नए बिजनेस शुरू करने के लिए लोगों को प्रेरित करना है.

उन्हें ट्रेनिंग देना और संसाधन देना है. इसके तहत पारंपरिक मछली पालन को एक आधुनिक और मुनाफे वाले उद्योग में बदला जाता है.

Written by
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