नई दिल्ली. मछली पालन के लिए सबसे जरूरी तालाब की तैयारी है. क्योंकि मछलियां इन्हीं तालाब में पलती हैं और फिर ग्रोथ हासिल कर कमाई कराती हैं. इसलिए तालाब की तैयारी (Pond Preparation) पर ज्यादा ध्यान देना चाहिए. फिश एक्सपर्ट का कहना है कि तालाब की तैयारी का सही समय मार्च-अप्रैल होता है. इसी दौरान तालाब सुखाकर तैयार करना चाहिए. क्योंकि ठंड के मौसम में मछलियों की ग्रोथ कम होती है, इसलिए मार्च-अप्रैल में सीड डालने पर दिसंबर तक मछलियां पूरी तरह तैयार होकर निकल जाती हैं. इससे आपको नुकसान नहीं होता है.
तालाब तैयार करने के लिए मिट्टी का काम और जुताई करना होता है. इसके लिए पुराने तालाब से अतिरिक्त गाद, मिट्टी निकाल कर लेवल बनाया जाता है और जुताई की जाती है फिर तालाब में लगभग एक क्विंटल चूना और एक ट्रॉली गोबर की खाद डालकर जमीन तैयार की जाती है. इसके बाद नंबर आता है तालाब में पानी भरने का. तालाब में 8-10 दिन बाद पानी भरा जाता है.
लागत और कमाई का गणित जानें
फिश एक्सपर्ट की मानें तो तालाब में पानी का स्तर लगभग 5 से 7 फीट तक होना पर्याप्त माना जाता है.
मछली पालन के लिए कन्हारी मिट्टी (काली/चिकनी मिट्टी) सबसे अच्छी होती है, क्योंकि यह पानी को अच्छी तरह रोकती है.
मछली की नस्लें और स्टॉक की बात करें तो (Stocking Density) डेढ़ एकड़ के तालाब में लगभग 10 हजार मछलियां डाली जाती हैं.
अगर आप मुख्य रूप से पंगेसियस (Pangasius) मछली पालते हैं तो छह महीने में आपको उत्पादन मिल जाएगा.
हालांकि इसके साथ आप मिक्सिंग में रोहू और कतला लगभग 300-400 नग भी डाल सकते हैं.
50 से 100 ग्राम साइज का फिंगरलिंग डालने पर छह महीने में पंगोसियस लगभग 1 किलो वजन की तैयार हो जाती है.
वहीं रोहू और कतला भी 8 महीने में 1 से 1.5 किलो तक वजन हासिल कर लेती है.
एक तालाब का हिसाब (डेढ़ एकड़) 10,000 मछलियों के कमर्शियल दाने (फीड) और तैयारी में लगभग 8 लाख का खर्च आता है.
हालांकि मछलियों तैयार हो जाती हैं तो इस दौरान लगभग 12 से 13 लाख की बिक्री होती है.
इस तरह एक तालाब से लगभग 4 लाख से 5 लाख तक का मुनाफा मिलता है.
निष्कर्ष
सिर्फ मछली पालन से सालाना लगभग 4 से 5 लाख का शुद्ध मुनाफा कमाया जा सकता है. यदि आप इस काम के साथ मुर्गी, बत्तख आदि पालन करें तो कमाई कई गुना बढ़ जाएगी.












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