नई दिल्ली. पोल्ट्री फार्मिंग में बैकयार्ड पोल्ट्री फार्मिंग (Poultry Farming) कम बजट वाली और ज्यादा सेफ मानी जाती है. क्योंकि इसमें न तो बड़े शेड की जरूरत पड़ती है और न ही पोल्ट्री फीड पर ज्यादा खर्च आता है. जबकि देसी मुर्गियां घर बचा अनाज और कीड़े आदि खाकर ही प्रोटीन से भरपूर अंडों और चिकन का उत्पादन करती हैं. यही वजह है कि पोल्ट्री फार्मिंग आने वाले नए लोगों के लिए ये फायदे के साथ बेहतरीन अनुभव भी देने वाला बिजनेस है. इसको देखते हुए गुरु अंगद देव गुरु अंगद देव वेटरनरी एंड एनिमल साइंसेज यूनिवर्सिटी में एक ट्रेनिंग प्रोग्राम आयोजित किया गया था, जिसमें साइंटिफिक तरीकों को अपनाने के बारे में जानकारी दी गई.
असल में गुरु अंगद देव वेटरनरी एंड एनिमल साइंसेज यूनिवर्सिटी, लुधियाना के लाइवस्टॉक प्रोडक्शन मैनेजमेंट डिपार्टमेंट ने 10 बेनिफिशियरी स्टूडेंट्स के लिए “साइंटिफिक बैकयार्ड पोल्ट्री फार्मिंग ट्रेनिंग और प्रैक्टिकल डेमोंस्ट्रेशन” पर एक दिन का ट्रेनिंग प्रोग्राम ऑर्गनाइज किया. कोर्स डायरेक्टर डॉ. यशपाल सिंह ने बताया कि यह प्रोग्राम “पशुपालन, डेयरी और मछली पालन में एंटरप्रेन्योरियल स्किल डेवलपमेंट के लिए SC स्टूडेंट्स (UG और PG) और SC किसानों की ट्रेनिंग” टाइटल के तहत किया गया था, ताकि सेल्फ-एम्प्लॉयमेंट और एम्प्लॉयमेंट जेनरेशन हो सके.
छात्रों ने क्या-क्या सीखा,
यह सब-कंपोनेंट “शेड्यूल कास्ट सब-प्लान (SC-SP)” “भारत में एग्रीकल्चरल हायर एजुकेशन को मजबूत करना” के तहत किया गया था.
ट्रेनिंग को डॉ. दलजीत कौर, सुरेश कुमार और गुरप्रीत कौर ने कंडक्ट और कोऑर्डिनेट किया था.
यह प्रोग्राम स्टूडेंट्स को बैकयार्ड पोल्ट्री फार्मिंग में साइंटिफिक नॉलेज और प्रैक्टिकल स्किल्स देने के मकसद से किया गया था.
जिसमें बेहतर पोल्ट्री मैनेजमेंट, कम लागत वाली हाउसिंग, फीडिंग, हेल्थ केयर, बायोसिक्योरिटी, ब्रीड सिलेक्शन, चिक मैनेजमेंट और पोल्ट्री रिसोर्स के अच्छे इस्तेमाल पर खास जोर दिया गया था.
ट्रेनिंग के दौरान, स्टूडेंट्स को साइंटिफिक बैकयार्ड पोल्ट्री प्रोडक्शन के प्रिंसिपल्स से इंट्रोड्यूस कराया गया.
जिसमें सही पक्षियों का सिलेक्शन, हाउसिंग की जरूरतें, स्पेस मैनेजमेंट, फीडिंग और वॉटरिंग के तरीके, लिटर मैनेजमेंट, सैनिटेशन और बीमारी की रोकथाम शामिल थे.
पार्टिसिपेंट्स को बैकयार्ड पोल्ट्री फार्मिंग के पोटेंशियल के बारे में भी बताया गया. कम इन्वेस्टमेंट और इनकम देने वाला एंटरप्राइज, खासकर गांव के घरों और बेरोज़गार युवाओं के लिए.
स्टूडेंट्स ने ट्रेनिंग के दौरान दिखाए गए साइंटिफिक तरीकों को अपनाने में गहरी दिलचस्पी दिखाई.
डॉ. एस.एस. रंधावा, डीन, कॉलेज ऑफ़ वेटरनरी साइंस ने डिपार्टमेंट के फैकल्टी मेंबर्स को ट्रेनिंग प्रोग्राम ऑर्गनाइज करने के लिए बधाई दी.
साथ ही स्टूडेंट्स को साइंटिफिक बैकयार्ड पोल्ट्री फार्मिंग में काम का प्रैक्टिकल अनुभव और स्किल-ओरिएंटेड लर्निंग देने के उनके प्रयासों की तारीफ़ की.











Leave a comment