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Animal Disease: लंपी स्किन डिजीज पर यूपी ने पा लिया काबू, समय पर इलाज से जल्द ठीक हो रहे पशु

इस तरह से पशु के शरीर पर निकल आती हैं गाठें.

नई दिल्ली. उत्तर प्रदेश के पशुपालन विभाग के रोग नियंत्रण एवं प्रक्षेत्र की निदेशक डॉ. संगीता तिवारी ने कहा कि गोवंश में होने वाले लंपी स्किन डिजीज (LSD) पर काबू पा लिया गया है. रोग के लक्षण की पहचान करने, रोकथाम और टीकाकरण पर जोर दिया जा रहा है. जिससे प्रदेश में लंपी स्किन डिजीज (LSD) पर नियंत्रण पा लिया गया है. यही वजह है कि साल 2022 की तुलना में अब वायरस की घातकता (Virulence) काफी घट चुकी है. पशुओं में हर्ड इम्युनिटी (Herd Immunity) विकसित हो जाने के कारण अब गांठें फटती नहीं हैं, समय पर इलाज से पशु जल्दी ठीक हो जाते हैं और मृत्यु दर ना के बराबर रह गई है.

उन्होंने आगे कहा कि यह एक विषाणु जनित (वायरल) रोग है. मुख्य रूप से यह वेक्टर बोर्न (Vector-borne) बीमारी है, यानी यह मक्खियों, मच्छरों और किलनी या चिचड़ी (Ticks) के काटने से एक पशु से दूसरे पशु में फैलती है. इसके अलावा संक्रमित पशु की लार, नाक के स्राव और जूठे चारे-पानी से भी फैल सकती है.

क्या हैं लंपी के लक्षण
उन्होंने पशुपालकों से सतर्क रहने की भी अपील की. कहा कि लक्षणों को पहचानें. इस बीमारी पूरे शरीर पर बड़ी-बड़ी गांठें पड़ जाती हैं.

तेज बुखार होना, पैरों में सूजन आना और मुंह से लार टपकना आम बात है.

कमजोर रोग प्रतिरोधक क्षमता (Immunity) वाले पशुओं पर इसका असर सबसे पहले और गंभीर होता है.

रोकथाम और देखभाल
पशुबाड़े में पानी न जमा होने दें, मक्खी-मच्छर भगाने के लिए धुआं (फ्यूमिगेशन) और एंटीसेप्टिक स्प्रे करें.

घरेलू या मनमाने इलाज के बजाय योग्य पशु चिकित्सक की देखरेख में ही दवा, डिहाइड्रेशन ड्रिप और सपोर्टिव थेरेपी (विटामिन्स) दिलवाएं.

टीकाकरण (Vaccination) के नियम
बरसात का मौसम शुरू होने से पहले ही गोवंश का एलएसडी (LSD) टीकाकरण करवा लें, इससे बचाव संभव है.

हलांकि गर्भवती गायों को जो अंतिम तिमाही में हैं उन्हें प्रसव के बाद ही टीका लगवाएं.

4 महीने से छोटे बछड़े को मां से प्राकृतिक एंटीबॉडी (Maternal Immunity) मिलती है.

इसलिए 4 महीने से अधिक उम्र होने पर ही टीका लगवाएं.

लक्षण दिखाई दे तो तुरंत मोबाइल वेटरनरी यूनिट (MVU): 1962 (टोल-फ्री) पर कॉल करें.

या फिर पशुपालन विभाग टोल-फ्री नंबर: 1800 180 5141 पर कॉल करके टेलीमेडिसिन और विशेषज्ञ से सलाह लें.

निष्कर्ष
लक्षणों को पहचान कर बीमारी का समय पर इलाज किया जा सकताा है. ये भी जान लें कि बीमार पशु का दूध फेंकने की आवश्यकता नहीं है. दूध को अच्छी तरह उबालने (Boil करने) के बाद वह पूरी तरह सुरक्षित हो जाता है. क्योंकि वायरस नष्ट हो जाता है. ​

Written by
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