Home मछली पालन Seaweed Production: अगले पांच वर्षे में 11.2 लाख टन बढ़ाया जाएगा समुद्री शैवाल का उत्पादन
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Seaweed Production: अगले पांच वर्षे में 11.2 लाख टन बढ़ाया जाएगा समुद्री शैवाल का उत्पादन

seaweed
प्रतीकात्मक तस्वीर.

नई दिल्ली. समुद्र में उगने वाला सीवीड जिसे समुद्री शैवाल कहा जाता है, इसकी खेती को बढ़ावा देने के लिए सरकार की तरफ से कई प्रयास किए जा रहे हैं और सरकार ने इसकी खेती को अगले पांच वर्ष में बढ़ाने के लिए बड़ा टारगेट भी सेट किया है. असल में सीवीड पोषक तत्वों से भरपूर एक अनमोल समुद्री पौधा है. इसके अंदर भरपूर मात्रा में विटामिन, खनिज, अमीनो एसिड और 54 से ज्यादा जरूरी सूक्ष्म तत्व पाए जाते हैं. जो कई बीमारियों से लड़ने में मददगार है. इसलिए इसके उत्पादन को बढ़ावा देकर कई फायदे लिए जा सकते हैं.

गौरतलब है कि सीवीड एक ऐसा समुद्री पौधा है जो समुद्र और महासागरों में प्राकृतिक रूप से उगता है. इसकी खेती के लिए ना तो कृषि भूमि की जरूरत होती है और ना ही मीठे पानी की जरूरत होती है. वहीं इसकी खेती के लिए किसी भी तरह के उर्वरक और कीटनाशक की भी जरूरत नहीं पड़ती है.

पर्यावरण के लिए है बेहद अनुकूल
एक्सपर्ट कहते हैं कि इसलिए इसे पर्यावरण के अनुकूल और टिकाऊ खेती का उत्कृष्ट विकल्प माना जाता है.

अगर इसके वैश्विक उद्योग की बात की जाए तो 5.6 बिलियन डॉलर का वैश्विक उद्योग है. वहीं भारत में भी इसका उत्पादन तेजी के साथ बढ़ रहा है.

इसी वजह से प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के तहत इसे बढ़ावा देने का काम सरकार की तरफ से किया जा रहा है.

वहीं अगले पांच वर्षों में सीवीड उत्पादन को 11.2 लाख टन बढ़ाने के लक्ष्य तय किया गया है.

आपको बता दें कि सीवीड यानी समुद्री शैवाल की खेती मुख्य रूप से समुद्र के खारे पानी में की जाती है.

भारत में तमिलनाडु और गुजरात की तटीय इलाकों लक्षद्वीप अंडमान निकोबार दीप समूह के इलाके इसके प्राकृतिक विकास और खेती के लिए सबसे उपयुक्त माने गए हैं.

इसे उगाने की प्रक्रिया के तौर पर मुख्य रूप से रस्सियां आदि का उपयोग किया जाता है.

इसे सीधे प्राकृतिक धूप की मदद से समुद्र में उगाया जाता है. सीवीड को उगाने के लिए पानी का तापमान सामान से 25 से 30 डिग्री के बीच होना चाहिए.

वहीं इसके लिए पानी कम से कम घुटने तक होना चाहिए और पौधों के विकास के लिए पानी का हल्का बहाव बहुत जरूरी है.

निष्कर्ष
इसे बेहद ही आसानी के साथ 45 से 60 दिनों के अंदर कटाई के लिए तैयार कर लिया जाता है. इसकी कटाई जड़ से थोड़ा ऊपर से की जाती है ताकि दोबारा कटाई की जा सके.

Written by
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