Home पशुपालन Disease: खच्चर को ग्लैंडर्स बीमारी होन के बाद घोड़े समेत अन्य जानवरों की आवाजाही पर लगी पाबंदी, पढ़ें डिटेल
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Disease: खच्चर को ग्लैंडर्स बीमारी होन के बाद घोड़े समेत अन्य जानवरों की आवाजाही पर लगी पाबंदी, पढ़ें डिटेल

ग्लैंडर्स रोग के बारे में पता है कि यह एक संक्रामक रोग है.
प्रतीकात्मक तस्वीर.

नई दिल्ली. हरियाणा के हिसार जिले में सुल्तानपुर नाम के गांव में एक खच्चर में ग्लैंडर्स बीमारी की पुष्टि होने के बाद पशुपालन विभाग सतर्क हो गया है. इस मामले के आने के बाद पशुपालन विभाग ने हिसार जिले से घोड़े, गधे और खच्चरों आदि पशुओं की आवाजाही पर प्रतिबंध लगा दिया है. इस संबंध में पशुपालन एवं डेयरी विभाग के डिप्टी डायरेक्टर सुभाष चंद्र जांगड़ा ने बताया कि बीमारियों का खतरा ज्यादा न बढ़े, इस वजह से इन पशुओं से संबंधित दौड़, मेले, प्रदर्शनी और खेलों की आयोजन पर पूरी तरह से पाबंदी लगा दी गई है. ताकि अन्य जानवरों को बचाया जा सके. वहीं बीमारी के खतरे को कम किया जा सके.

नेशनल रिसर्च सेंटर ऑन इक्वाइन्स (NRCE) के डॉ. नितिन विरमानी का कहना है कि ग्लैंडर्स के मामले की खोज के बाद अधिकारियों ने संक्रमित पशुओं को इच्छामृत्यु देने की सिफारिश की है. कुछ महीनो में ग्लैंडर्स के तीन मामले सामने आए हैं. जिसमें से दो हिसार में और एक रोहतक में है. विरमानी ने बताया कि इस बीमारी का कोई इलाज नहीं है और संक्रमित जानवरों के लिए इच्छामुत्यु ही एक मात्र उपाय है.

NRCE करता है बीमारी के रोकथाम के लिए काम
वहीं इस बीमारी को रोकने के लिए हिसार जिले को एक नियंत्रित क्षेत्र घोषित किया गया है. जहां कड़ी सतर्कता बरती जा रही है. NRCE अधिकारियों के मुताबिक पिछले साल ग्लैंडर्स के 70 मामले सामने आए थे और पिछले कुछ सालों में संक्रमण की संख्या उतार-चढ़ाव होता रहा है. बता दें कि हिसार स्थित NRCE देश में घोड़े पर केंद्रित एकमात्र अनुसंधान केंद्र है. ये केंद्र ग्लैंडर्स जैसी खतरनाक बीमारी को नियंत्रित करने और उन्मूलन के उद्देश्य राष्ट्रीय कार्य योजना की क्रियान्वयन के लिए नोडल केंद्र के रूप में कार्य करता है.

कब कितने मामले आए सामने
आपको बताते चलें कि ये एक खतरनाक बीमारी है. यह घोड़ों को सबसे ज्यादा प्रभावित करती है. इस बीमारी में नाक से खून आने लगता है. सांस लेने में दिक्कत होने लगती है. इतना ही नहीं शरीर का सूखापन और त्वचा पर फोड़े जैसे लक्षण दिखाई देते हैं. इस बीमारी के अन्य घरेलू जानवरों में भी होने का खतरा रहता है. पिछले कुछ सालों में ग्लैंडर्स बीमारी के कई मामलों पुष्टि हुई है. साल 2012 में 7, 2013 में 12, 2014 में 13, 2015 में 47, 2016 में 142, 2017 में 308, 2018 में 435, 2019 में 210, 2020 में 139, 2021 में 249, 2022 में 106 और 2023 में 70 मामले सामने आ चुके हैं.

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