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Goat Farming: गर्मी में भी बकरी के बच्चों को हो सकता है निमोनिया, ऐसे बचाएं अपने जानवर

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प्रतीकात्मक तस्वीर.

नई दिल्ली. बकरी सर्दी में ही नहीं बल्कि गर्मी में भी बीमार हो जाती है. लोगों का मानना है कि सर्दी लगने से बकरी को निमोनिया हो जाता है लेकिन गर्मी में भी बकरी को निमोनिया हो जाता है. अगर उत्तर प्रदेश के मथुरा स्थित केंद्रीय बकरी अनुसंधान संस्थान यानी सीआईआरजी के वैज्ञानिकों की मानें तो निमोनिया जैसे बीमारी में कई बार बकरी की जान तक चली जाती है. इसलिए ये बेहद जरूरी है कि जब गर्मी शुरू हो जाए तो बकरी पालकों को चाहिए बकरियों के आवास में बदलाव करना शुरू कर दें.

कहा जाता है कि बकरी को एक खूंटे पर बांधकर भी पाला जा सकता है. ये बात सच है लेकिन लापरवाही की वजह से बकरी बीमार भी हो जाती है. कभी-कभी बड़ी लापरवाही के कारण बकरी मर भी जाता है, जिससे किसान या पशुपालक को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है. लोग सोचते हैं कि बकरी को गर्मी के मौसम में निमोनियानहीं हो सकता लेकिन ऐसा सोचना पूरी तरह से गलत है. गर्मी में तो बकरियों का दूध भी कम हो जाता है. सबसे ज्यादा नुकसान बकरियों के बच्चों को होता है. बकरियों के बच्चों को ज्यादा गर्मी और सर्दी भी नुकसान कर जाती है. उत्तर भारत में बकरियों के बच्चों में मृत्यु दर सबसे ज्यादा देखने को मिल रही है.

लापरवाही बरती तो चपेट में आ सकता है बच्चा
डॉक्टर राजेंद्र पाराशर बताते हैं कि भारत में जब भी मौसम बदलता है तो आम इंसान से लेकर पशुओं को भी कभी—कभी बीमार कर देता है. हम कहते भी हैं कि मौसम बदलने की वजह से बीमार हो रहे हैं. बतौर उदारण जैसे जब अचानक मौसम बदलता है बकरी के बच्चे अपने आपको उस मौसम के हिसाब से ढाल नहीं पाते. यही वजह है कि वे निमोनिया की चपेट में आ जाते हैं. बच्चों को बुखार आने लगता है, नक बहने लगती और सांस लेने में दिक्कत शुरू हो जाती है. कभी—कभी तो ये निमोनिया बच्चों की मौत का भी सबब बन जाता है. पशुपालकों को चाहिए कि अगर बच्चों या बकरी में ये लक्षण दिखने लगे तो फौरन पशुचिकित्सक के पास जाएं और इलाज कराएं.

आवास में भी कर दें ये बदलाव
डॉक्टर राजेंद्र पाराशर बताते हैं कि जब भी मौसम बदले पशुपालक खुद को अलर्ट मोड पर रखें और जैसे ही जानवर में कुछ बदलाव दिखे तो फौरन डॉक्टर से संपर्क करें. गर्मी का आगाज होतजे ही सबसे पशुपालक अपने बकरी के बकरियों के आवास में बदलाव करना शुरू कर दें. बकरियों के शेड को इस तरह ये ढक दें, जिससे गर्म हवा न पहुंच पाए. दूसरा उपाय है कि दोपहर को एकसे चार बजे तब बकरियों और उनके बच्चों को बिल्कुल भी चराने के लिए बाहर न ले जाएं. गर्मियों के सीजन में तो सुबह और शाम को ही चराने ले जाएं. जानवरों को खूब पानी पिलाएं. पानी ठंडा हो न कि गर्म, गर्मियों में बक​रियों के चरने की क्षमता कम हो जाती है इसलिए कोशिश करें कि उन्हें शेड में ही चारा खिलाएं. पशुपालक प्रयास करें कि गर्मी के दौरान बकरी और उनके बच्चों को क्षमता के हिसाब से न्यूट्रिशनदें.

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