Home पशुपालन Goat: प्रेग्नेंट बकरी की देखभाल में साफ-सुरक्षित फार्म, संतुलित-पौष्टिक आहार व नियमित स्वास्थ्य जांच है जरूरी
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Goat: प्रेग्नेंट बकरी की देखभाल में साफ-सुरक्षित फार्म, संतुलित-पौष्टिक आहार व नियमित स्वास्थ्य जांच है जरूरी

अच्छी फसल और अच्छी नस्ल दोनों पशुपालन में मायने रखती हैं. ठीक उसी प्रकार बकरी पालन में भी ये नियम मायने रखता है.
बाड़े में बकरियां

नई दिल्ली. गाभिन (गर्भवती) बकरियों की देखभाल और रखरखाव सही से करना बेहद ही जरूरी है. क्योंकि सही देखभाल से ही स्वस्थ मेमने पैदा होंगे और बकरियों की दूध उत्पादन क्षमता बेहतर हो जाती है. इसलिए गाभिन बकरियों की सही देखभाल बकरी फार्म की सफलता के लिए बेहद महत्वपूर्ण है. सही रखरखाव से मेमने स्वस्थ पैदा होते हैं और मां बकरी भी दूध देने के लिए तैयार रहती है. इसलिए बकरियों के आवास और उनके रहने की सही व्यवस्था करना जरूरी है. साथ ही प्रसव से पहले की तैयारी और खानपान आदि पर भी ध्यान देने की जरूरत है.

आवास और रहने की व्यवस्था (Housing) की बात करें तो बकरियों को गर्भावस्था के अंतिम 1-1.5 महीने में बाकी झुंड और नरों (बकरों) से अलग रखें. उनका फर्श सूखा, साफ और फिसलने रहित होना चाहिए. गीले या फिसलन वाले फर्श से गिरने पर गर्भपात का खतरा रहता है. सर्दियों में 2-3 इंच मोटी परत में सूखी घास, पुआल या मूंगफली के छिलके बिछाएं और बाड़े में ताजा हवा का आवागमन अच्छा हो, लेकिन सीधी ठंडी हवा से बचाएं.

डिलीवरी से पहले की तैयारी
डिलीवरी की संभावत तारीख से 8-10 दिन पहले बकरी को अलग, शांत और कीटाणुरहित कमरे या बाड़े में रखें.

लक्षणों पर नजर रखें. अडर का बड़ा होना इसकी पहचान में से एक है.

पूंछ के पास के पूढ़ों का दीला पड़ना.

बार-बार उठना-बैठना और मिमियाना भी डिलीवरी के नजदीक होने के संकेत हैं.

खान-पान और पोषण (Feeding & Nutrition) का ध्यान रखें.

संतुलित दाना दें. शुरुआती 3 महीने में 200-300 ग्राम प्रतिदिन दें.

अंतिम 1.5 से 2 महीने 400-600 ग्राम प्रतिदिन दाना दें.

रोजाना सुपाच्य हरा चारा दें. जिसमें बरसीम, रिजका और लोबिया शामिल करें.

सूखे चारे के तौर पर भूसा या अन्य चीजें काटकर दें.

बकरियों को 10-15 ग्राम खनिज मिश्रण और 5 ग्राम साधारण नमक रोजाना दाने में मिलाकर दें.

गर्भवती बकरियों को दिन में 3-4 बार साफ और ताजा पानी उपलब्ध कराएं.

डीवार्मिंग करें. हालांकि पशु चिकित्सक से जरूर सलाह ले लें.

प्रसव से 4-6 सन्ताह पहले ET (Enterotoxemia) का टीका लगवाएं, जिससे मेमने को शुरुआती दिनों में सुरक्षा मिले.

धक्का-मुककी से बचाव जरूरी गर्भवती बकरी को पेट पर दबाव न पड़ने दें और न ही उन्हें ऊंचे स्थानों से कूदने दें.

निष्कर्ष
याद रखें कि गर्भवती बकरियों को साफ और सुरक्षित आवास, संतुलित और पौष्टिक आहार, नियमित स्वास्थ्य जांच, समय पर टीकाकरण करना जरूरी है. इससे बकरी और मेमनों दोनों हैल्दी रहेंगे.

Written by
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