नई दिल्ली. बकरा-बकरी पालने का बिजनेस बहुत ही शानदार है. बकरी से जहां दूध उत्पादन करके आप अच्छी कमाई कर सकते हैं तो वहीं बकरे को मीट के लिए बेचकर मोटा मुनाफा कमा सकते हैं. यदि कोई बकरी पालक बकरे-बकरियों को पालें तो एक साल में लगभग 8 से 10 लाख रुपए तक कमा सकता है, लेकिन यह सब बकरी पालन के खर्च, नस्ल, प्रजननदर और सही मैनेजमेंट पर भी निर्भर करता है. केंद्रीय बकरी अनुसंधान संस्थान (CIRG) की मानें तो 8 से 10 लाख रुपए में बकरे को बेचकर दो लाख रुपए तक का शुद्ध मुनाफा कमाया जा सकता है.
बकरी पालन के एक्सपर्ट की ओर से बताया गया कि बकरी पालन का मुनाफा और कमाई बकरे-बकरियों को बेचने की टाइमिंग पर भी काफी हद तक निर्भर करती है. बकरी पालकों को पता होना चाहिए कि कौन सा वक्त सही है. जब बकरे या बकरी को बेचा जाए ताकि उसका अच्छा दाम मिले. कई बार सही टाइमिंग का चुनाव न करने की वजह से भी मुनाफा कम रह जाता है. जिससे बकरी पालन के काम में नुकसान होता है. इसलिए सही समय का चुनाव भी बेहद जरूरी है.
ये सही सही वक्त बेचने का
एक्सपर्ट का कहना है कि बकरा या बकरी शुरुआती 4 से 5 महीने में जो चारा वगैरह खाती है तो उससे 4 से 5 महीने तक उतना बेहतर रिजल्ट नहीं मिलता है. इसलिए ये समय बकरा या बकरी को बेचने का सही नहीं माना जाता है.
जबकि 6 महीने का वक्त गुजारने के बाद बकरा या बकरी का वजन बहुत तेजी से बढ़ता है. जिसे एफसीआर कहा जाता है.
एक्सपर्ट का कहना है कि बकरा या बकरी की उम्र जब 10 से 11 महीने हो जाए तभी उसे बेचें. क्योंकि इस दौरान खाने पीने का खर्च कम रहता है और उसका वजन भी ज्यादा रहता है. जब बॉडिवेट ज्यादा रहता है तो दम भी अच्छा मिलता है.
बहुत से बकरी पालक इस वजह से 10 से 11 महीने में बकरा नहीं बेचते, क्योंकि उसमें बदबू भी आ जाती है.
ऐसे में जो किसान जागरूक नहीं है वह इस बात को लेकर घबराते हैं कि अगर बदबू आ जाएगी तो कोई उनका जानवर नहीं खरीदेगा. इसलिए वह 4 से 5 महीने की उम्र में ही बेच देते हैं. जिससे उन्हें फायदा नहीं होता.
निष्कर्ष
हालांकि इसका भी उपाय है. अगर किसान बकरे का बधियाकरण करा दें तो उसमें बदबू नहीं आएगी और फिर आराम से उसे 10 से 11 महीने में बेचकर मोटी कमाई करें.










