नई दिल्ली. मछलि यों के तालाब में चूना, पोटैशियम परमैगनेट, फिटकरी और नमक का इस्तेमाल समय—समय पर किया जाता है. अगर आप मछली पालक हैं तो आप इसकी अहमियत को जानते ही होंगे. अगर आप मछली पालन में नए हैं तो यह जानना आपके लिए बेहद जरूरी है कि इसका इस्तेमाल कब करना चाहिए और इसके इस्तेमाल से क्या फायदा होता है. क्योंकि मछली पालन के काम में इसकी बड़ी अहमियत मानी जाती है. तो आइए हम आपको इस रिपोर्ट में बताते हैं कि चूना, पोटैशियम परमैगनेट, फिटकरी और नमक की क्या जरूरत है, मछलियों के तालाब में.
इसको इस्तेमाल किया जाता है यह बात तो बिल्कुल साफ है लेकिन कैसे इस्तेमाल करना है और इसके फायदे जब तक आपको नहीं पता होंगे तो ऐसा आप नहीं करेंगे. इतना बता दें कि ये मछलियों के लिए बहुत ही फायदमेंद होता है.
आइए फायदों के बारे में यहां जानें
बात अगर पोटैशियम परमैगनेट की करें तो ये तालाब में मौजूद हानिकारक बैक्टीरिया को खत्म करने का काम करता है.
जिससे मछलियां बीमारियों से सुरक्षित रहती हैं और तालाब का पानी भी हैल्दी बना रहता है.
वहीं अगर नमक की बात की जाए तो तालाब में नमक डालने से मछलियों की रोग प्रतिरोधक क्षमता बहुत ज्यादा बढ़ जाती है.
जबकि मछलियों को कीड़ों का भी खतरा नहीं रहता है. उन्हें फंगल इंफेक्शन से भी नमक बचाता है. साथ में मछलियों की स्ट्रेस को कम करने का भी कम नमक करता है.
वहीं चूने की बात की जाए तो इसके कई फायदे हैं. आपके पानी के पीएच बैलेंस को मेंटेन कर देता है.
जबकि तालाब में मछलियों को जो फंगल इंफेक्शन होता है या कोई जख्म हो जाता है या कोई चोट लग जाती है तो उससे भी सही करता है.
एक्सपर्ट का कहना है कि पानी को साफ और सेहतमंद बनाए रखता है. साथ ही मिट्टी की क्वालिटी को भी बढ़ा देता है.
वहीं पानी में मछलियों की वजह से जो चिपचिपन आता है. चूना उसको भी खत्म करने का काम करता है.
चूने के इस्तेमाल की बात की जाए तो इसको पानी में भिगो देना चाहिए और फिर तालाब में छिड़कना चाहिए.
क्योंकि चूना बहुत गर्म होता है. इसलिए इसे भिगोकर उसका तापमान मेंटेन करना बहुत ही जरूरी होता है.
वहीं फिटकरी तालाब के पानी को साफ और पारदर्शी बनाने में मदद करती है. ये पानी को एकदम क्लियर क्लस्टर बनाती है.
वहीं पानी में मौजूद मिट्टी और गंदगी को उनको नीचे करने का काम करती है.












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