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Fish Farming: मई में मछली पालक पूरक आहार के इस्तेमाल में पांच बातों का जरूर रखें ध्यान

फिश एक्सपर्ट का कहना है कि मछली सेहत के लिए फायदेमंद है.
प्रतीकात्मक तस्वीर

नई दिल्ली. इन दिनों गर्मी पीक पर आ चुकी है. दिन में टेंप्रेचर 40 डिग्री के पार चला जा रहा है. अभी और ज्यादा टेंप्रेचर बढ़ सकता है और गर्मी से न सिर्फ इंसानों बल्कि जीव-जंतुओं को भी दिक्कतें होंगी. ऐसे में बिहार सरकार के डेयरी, मत्स्य एवं पशु संसाधन विभांग की ओर से मछली पालकों के लिए कुछ एडवाइजरी जारी की गई है. एक्सपर्ट ने बताया कि इस महीने पूरक आहार का प्रयोग सही मात्रा, सही गुणवत्ता, सही समय और तालाब में सही जगह पर करें. साथ ही मछली के शरीर भार के अनुपात और मांग के अनुसार करें.

एक्सपर्ट कहते हैं कि गोबर एवं चूना का प्रयोग एक साथ ना करें. मछली बीज उत्पादक सिल्वर कार्प के ब्रीडिंग का कार्य हैचरी में शुरू कर सकते हैं. मछली बीज उत्पादक स्पॉन से फ्राई बनाने तक अपने तालाब में रासायनिक उर्वरक का प्रयोग ना करें. तालाब में मछली का औसत वजन 1-1.5 किलो ग्राम होने पर बिक्री के लिए निकासी कर लें. मछली की निकासी से एक दिन पूर्व आहार देना बन्द कर दें.

ऑक्सीजन की मात्रा गिरने की संभावना रहती है
मई माह में तापमान, आर्द्रता ज्यादा रहने एवं असमय वर्षापात के कारण तालाब के पानी में घुलनशील ऑक्सीजन की मात्रा गिरने की संभावना प्रबल रहती है.

घुलनशील ऑक्सीजन की मात्रा संतुलित रखने एवं पानी में फाईटोप्लैंक्टान की उपलब्धता बनाये रखने के लिए 15 किलोग्राम सिंगल सुपर फॉस्फेट घोल कर छिड़काव प्रति एकड़, प्रति माह की दर से करना सुनिश्चित करें.

समस्या आने पर खतरे को देखते हुए घुलनशील ऑक्सीजन बढ़ाने वाली दवा का सुखा छिड़काव 500 ग्राम प्रति एकड़ की दर से करें.

या एरेटर, एयर ब्लोयर का उपयोग सुबह एवं शाम 4 से 6 घंटा तक करें. मछली बीज का परिवहन हमेशा ठंडे वातावरण में करें.

मछली बीज का व्यवसाय करने वाले किसान अपनी नर्सरी तालाब को सुखाकर, जोतकर 1000-2000 किलोग्राम गोबर, 50 कि0ग्रा0 चूना प्रति एकड़ की दर से छिड़काव कर तुरंत 1 फिट पानी तालाब में भर दें.

5-7 दिन बाद 5 फिट तालाब में पानी भर कर मत्स्य बीज यानि स्पॉन 20 लाख प्रति एकड़ की दर से संचयन करने से 24 घंटा पूर्व आधा किलो ग्राम प्रति एकड़ की दर से पोटैशियम परमेंगनेट का छिड़काव कर नसरीं तालाब को संक्रमण रहित कर दें.

नर्सरी तालाब से मत्स्य बीज निकासी से एक दिन पूर्व पूरक आहार का प्रयोग बन्द कर देना चाहिए.

अत्यधिक वर्षापात होने पर वर्षापात के बाद 20-25 कि०ग्रा० चूना प्रति एकड़ की दर से तालाब में घोल कर छिड़काव करें.

तालाब के पानी का रंग हरा होने पर मासिक तौर पर उपयोग होने वाले चूना एवं रासायनिक खाद का प्रयोग 15 दिन से 1 माह तक बन्द कर दें.

तालाब मे मत्स्य बीज (फिंगरलिग, इयरलिंग) के संचयन का कार्य हमेशा पूर्वाहन यानि 8 से 12 बजे के बीच करें.

Written by
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