नई दिल्ली. देश और प्रदेश में पशुपालन को बढ़ावा दिया जा रहा है. इसके लिए सरकार पशुपालकों की आर्थिक मदद भी कर रही है. ताकि उन्हें आर्थिक तौर पर पशुपालन करने में कोई रुकावट न आए. उत्तर सरकार की तरफ से राज्य में पशुपालकों के लिए एक योजना लाई गई है. इसके लिए सरकार 90 फीसदी अनुदान दे रही है. लाभार्थी को सिर्फ छह हजार रुपये लगाना होगा और सरकार की ओर से 54 हजार रुपये अनुदान मिलेगा. प्रदेशभर के दो हजार से अधिक पशु पालकों को इसका लाभ देने की तैयारी की जा रही है. इसके लिए नई गाइडलाइन जारी कर दी गई है.
प्रदेश में बेहतर नस्लों, आधुनिक डेयरी फार्म और चारे की व्यवस्था को बढ़ावा देने के लिए पशुपालन विभाग ने नई योजना शुरू की है. इस योजना का उद्देश्य दूध उत्पादन बढ़ाना और किसानों की आय में स्थाई वृद्धि करना है. पशुपालन विभाग के विशेष सचिव देवेंद्र कुमार पांडेय ने नई गाइडलाइन जारी कर दी है. उन्होंने सभी जिलाधिकारियों और पशुपालन विभाग के अधिकारियों को पत्र भेजकर जल्द से जल्द लाभार्थियों का चयन करने का निर्देश दिया है.
महिलाओं को मिलेगी वरियता
जिले की स्थिति के अनुसार लाभार्थियों की संख्या तय की जाएगी. महिलाओं को वरीयता दी जाएगी. तीन फीसदी दिव्यांगजन को शामिल किया जाएगा.
भैंस, गाय और बकरी पालन प्रशिक्षण केंद्र और केंद्रीय पशुपालन संस्थान से प्रशिक्षण पाने वालों को वरीयता दी जाएगी.
पशुपालन योजना में एक पशुपालक और पांच पशुओं की यूनिट को स्वीकृति दी जाएगी. इस योजना में पशुपालक को कुल मिलाकर एक यूनिट ही मान्य होगी.
इस यूनिट में कुल 60 हजार रुपये का प्रावधान है, जिसमें पशुपालक को खुद सिर्फ छह हजार रुपये देने होंगे, जबकि सरकार की ओर से 54 हजार रुपये अनुदान दिया जाएगा.
इस राशि में अधिकतम 49 हजार रुपये तक पशु खरीदने और शेष राशि उपकरणों, चारे की व्यवस्था और अन्य जरूरी संसाधनों पर खर्च की जा सकेगी.
पशुपालन विभाग के अनुसार, इस योजना में देसी, जर्सी, होलस्टीन फ्रीजियन, मुर्रा भैंस और मेक्लेले एर्डवांस नस्लों के पशु शामिल किए जा सकते हैं.
साथ ही आधुमिक डेयरी उपकरणों, जैसे दुहने की मशीन, चारा कटाई मशीन, मिल्क कूलर आदि पर भी अनुदान दिया जाएगा.
निष्कर्ष
खासकर ये योजना बेरोजगार युवा के लिए अच्छी साबित हो सकती है. क्योंकि वो पशु पालकर छोटे ही स्तर पर, लेकिन पशुपालन शुरू कर सकता है. इससे उसके पास स्वरोजगार का जरिया होगा. जैसे—जैसे इस काम में सफलता मिलेगी पशु खुद ब खुद बढ़ते चले जाएंगे. वहीं इसका फायदा ये भी होगा कि राज्य में दूध उत्पादन बढ़ाने में मदद मिलेगी.











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