नई दिल्ली. भारत सरकार के पशुपालन और डेयरी विभाग (डीएएचडी) के तहत पशुओं पर प्रयोगों के नियंत्रण और पर्यवेक्षण के लिए समिति (सीसीएसईए) ने नई दिल्ली में “प्रयोगशाला पशु कल्याण: नीतियां और सर्वोत्तम प्रथाएं” पर एक राष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन किया. जिसका मकसद प्रयोगशाला पशु कल्याण मानकों को सुदृढ़ करना, नैतिक और जिम्मेदार अनुसंधान प्रथाओं को बढ़ावा देना और देशभर के नीति निर्माताओं, वैज्ञानिकों, पशु चिकित्सकों, नियामक अधिकारियों और संस्थागत प्रतिनिधियों के बीच सहयोग को प्रोत्साहित करना था. सम्मेलन में पशुओं के रखरखाव और उनके उपयोग में मानवीय और नैतिक प्रथाओं पर चर्चा की गई.
इसके साथ ही, यह नियामक ढांचों के प्रभावी कार्यान्वयन, प्रयोगशाला पशु कल्याण में प्रगति, संस्थागत अनुपालन और राष्ट्रीय व अंतर्राष्ट्रीय सर्वोत्तम प्रथाओं को अपनाने पर केंद्रित है. इस दौरान केंद्रीय मंत्री श्री राजीव रंजन सिंह ने इस बात पर जोर दिया कि यद्यपि वैज्ञानिक प्रगति, वैक्सीन विकास और दवाओं की खोज में पशु-आधारित अनुसंधान एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है, लेकिन नैतिक और मानवीय प्रथाओं के माध्यम से पशुओं के कष्ट और पीड़ा को न्यूनतम सुनिश्चित करना भी उतना ही महत्वपूर्ण है.
अंतर्राष्ट्रीय मानकों के मुताबिक हो रिसर्च
उन्होंने देश भर के अनुसंधान संस्थानों और एनिमल हाउस में पशु कल्याण मानकों को विनियमित करने में सीसीएसईए की केंद्रीय भूमिका पर प्रकाश डाला.
उन्होंने पशु कल्याण संबंधी दिशानिर्देशों का कड़ाई से पालन करते हुए अंतर्राष्ट्रीय मानकों के अनुरूप अनुसंधान और नवाचार को मजबूत करने पर बल दिया.
इसके अलावा, उन्होंने डेयरी क्षेत्र की वृद्धि और निर्यात क्षमता को बढ़ाने के लिए एफएमडी जैसे प्रभावी टीकाकरण कार्यक्रमों के महत्व को भी रेखांकित किया.
केंद्रीय राज्य मंत्री प्रोफेसर एस. पी. सिंह बघेल ने इस बात पर प्रकाश डाला कि वैज्ञानिक प्रगति को करुणा और उत्तरदायित्व के साथ आगे बढ़ना चाहिए.
भारत का दृष्टिकोण केवल अनुसंधान में नवाचार करना ही नहीं है, बल्कि प्रत्येक जीवित प्राणी के लिए गरिमा, देखभाल और नैतिक व्यवहार सुनिश्चित करना भी है.
केंद्रीय राज्य मंत्री जॉर्ज कुरियन इस बात पर जोर दिया कि वैज्ञानिक प्रगति हमेशा करुणा और नैतिक मूल्यों से निर्देशित होनी चाहिए.
उन्होंने कहा कि वास्तविक तकनीकी प्रगति केवल नवाचार में ही नहीं, बल्कि हर जीवित प्राणी के लिए गरिमा, देखभाल और सम्मान सुनिश्चित करने में भी निहित है.
पशुपालन और डेयरी विभाग के सचिव नरेश पाल गंगवार ने कहा कि जैसे-जैसे भारत तेजी से विकास कर रहा है, स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियां भी बढ़ रही हैं.
जिससे वैज्ञानिक अनुसंधान पहले से कहीं अधिक महत्वपूर्ण हो गया है. वैज्ञानिक प्रगति और पशु कल्याण के बीच संतुलन और सामंजस्य बनाए रखने की जरूरत पर जोर दिया.











Leave a comment