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Fisheries: मछली उत्पादन के लिए क्लस्टर विकास और बायोफ्लॉक जैसी आधुनिक तकनीकों पर जोर दिया जाएगा

Further, necessary provisions are made by the State Government in their respective Marine Fishing Regulation Acts Rules (Amendments) for the installation of Turtle Excluder Devices (TED) for the protection of sea turtles.
प्रतीकात्मक तस्वीर।

नई दिल्ली. मत्स्य पालन, पशुपालन और दुग्ध उत्पादन मंत्रालय ने मिजोरम के आइजोल में ‘क्षेत्रीय समीक्षा बैठक का पूर्वोत्तर क्षेत्र 2026’ में कई अहम मसलों पर चर्चा हुई. केंद्रीय मत्स्य पालन, पशुपालन और दूध उत्पादन मंत्रालय व पंचायती राज मंत्री राजीव रंजन सिंह ने इस दौरान पीएमएमएसवाई और एफआईडीएफ के तहत लगभग 32.15 करोड़ रुपये की प्रमुख परियोजनाओं का उद्घाटन एवं शिलान्यास किया. उन्होंने उत्तर पूर्वी क्षेत्र में आत्मनिर्भर मत्स्य पालन क्षेत्र को मजबूत करने के प्रति सरकार के संकल्प के बारे में बताया. राजीव रंजन सिंह ने सबसे बेहतर मत्स्य पालन स्टार्टअप और सहकारी समितियों सहित लाभार्थियों को मत्स्य पालन केसीसी कार्ड और पुरस्कार वितरित किए तथा उनसे बातचीत कर उनकी चुनौतियों को समझा और आगे सहयोग प्रदान किया.

केंद्रीय मंत्री ने पूर्वोत्तर क्षेत्र की मत्स्य पालन क्षमता का दोहन करने के लिए राज्यों और हितधारकों से समन्वित प्रयास करने का आह्वान किया, जिसमें उन्होंने सजावटी मत्स्य पालन में अवसरों पर प्रकाश डाला, क्योंकि यह क्षेत्र निर्यात के प्रमुख वाहक के रूप में उभर रहा है.

पूर्वोत्तर क्षेत्र में मत्स्य उत्पादन बढ़ेगा
उन्होंने एकीकृत एक्वापार्क और क्लस्टर विकास के माध्यम से मूल्य श्रृंखला को मजबूत करने पर बल दिया, जिसके लिए पहले ही सात क्लस्टर अधिसूचित किए जा चुके हैं.

उन्होंने पूर्वोत्तर क्षेत्र में मत्स्य उत्पादन में अत्यधिक वृद्धि के बारे में चर्चा की और एक्वापार्क, क्लस्टर विकास और बायोफ्लॉक जैसी आधुनिक तकनीकों के साथ-साथ एनएफडीपी के माध्यम से डिजिटलीकरण और बुनियादी ढांचे के विकास पर जोर दिया.

जिसमें मिजोरम में स्वीकृत 50 करोड़ रुपये का मछली विपणन केंद्र भी शामिल है.

उन्होंने राज्यों को स्पष्ट रूपरेखा और समय-सीमा के माध्यम से समय पर कार्यान्वयन सुनिश्चित करने का निर्देश दिया.

उत्तर पूर्वी क्षेत्रीय समीक्षा बैठक” में बहुउद्देशीय डेयरी सहकारी समितियों (एमडीसीएस) के दायरे को बढ़ाने के उद्देश्य से ग्राम स्तरीय आधारभूत सर्वेक्षण लॉन्च किया गया.

इसका लक्ष्य उत्तर पूर्वी राज्यों में डेयरी सहकारी समितियों को मजबूत करना और ग्रामीण डेयरी किसानों के लिए आजीविका के अवसरों को बढ़ाना है.

केंद्रीय मत्स्य पालन, पशुपालन एवं डेयरी मंत्री श्री राजीव रंजन सिंह ने “गुड हसबेन्ड्री प्रेक्टिसेस इन पिग फार्मिंग” नामक पुस्तिका और अफ्रीकन स्वाइन फीवर (एएसएफ) अवेयरनेस फिल्म को भी लॉन्च किया.

पुस्तिका में वैज्ञानिक तरीके से सूअर पालन, उत्पादकता में सुधार, रोग निवारण, आधुनिक प्रबंधन पद्धतियों और किसानों के लिए स्थायी आजीविका पर मार्गदर्शन दिया गया है.

एएसएफ फिल्म उत्तर पूर्वी क्षेत्र में एएसएफ की रोकथाम और नियंत्रण के लिए जागरूकता, तैयारी तथा समन्वित प्रयासों को बढ़ावा देती है.

Written by
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