नई दिल्ली. केंद्रीय मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी उत्पादन मंत्री राजीव रंजन सिंह ने पिछले दिनों एक कार्यक्रम में कहा कि केंद्रीय बजट 2025-26 में भारत के विशिष्ट आर्थिक क्षेत्र (ईईजेड) और खुले समुद्रों में मछली संसाधनों के लगातार उपयोग के लिए एक सहायक ढांचा तैयार करने की घोषणा की गई थी, जिसे “एक्सेस पास” के शुभारंभ और प्राधिकर पत्र (एलओए) के राष्ट्रीय रॉलआउट के माध्यम से अमल में लाया जा चुका है. उन्होंने कहा कि एलओए भारत के समुद्री मछली पालन क्षेत्र के लिए एक ऐतिहासिक उपलब्धि है, जो एक पारदर्शी और पूरी तरह से ऑनलाइन प्रणाली के माध्यम से खुले समुद्रों में मत्स्य पालन की विशाल अप्रयुक्त क्षमता को उजागर करेगी.
मंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि उभरते खुले समुद्रों के मत्स्य पालन इकोसिस्टम में समावेशी भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए इस पहल के तहत मछली पालन सहकारी समितियों और मत्स्य किसान उत्पादक संगठनों (एफएफपीओ) को प्राथमिकता दी गई है. उन्होंने आगे बताया कि सरकार ने विभिन्न प्रमुख योजनाओं के माध्यम से मत्स्य पालन क्षेत्र में 39 हजार करोड़ रुपये से अधिक का निवेश किया है. जिसके नतीजे में वैश्विक व्यापार चुनौतियों के बावजूद मछली उत्पादन में 100 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि हुई है.
विदेशी बंदरगाहों पर उतारी गई मछलियों को निर्यात माना जाएगा
उन्होंने 2025-26 का जिक्र किया और कहा कि इस दौरान समुद्री खाद्य का रिकॉर्ड निर्यात 73,891 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है.
केंद्रीय बजट 2026-27 का उल्लेख करते हुए उन्होंने बताया कि ईईजेड और खुले समुद्र में भारतीय जहाजों द्वारा पकड़ी गई मछलियों को शुल्क मुक्त कर दिया गया है.
कहा कि विदेशी बंदरगाहों पर उतारी गई मछलियों को निर्यात माना जाएगा, जिससे इस क्षेत्र में विकास के नए अवसर पैदा होंगे.
उन्होंने सभी हितधारकों से ‘विकसित भारत 2047’ के विजन की दिशा में मिलकर काम करने और भारत की ‘नीली क्रांति’ और ‘नीली अर्थव्यवस्था’ को और मजबूत करने का आह्वान किया.
कहा कि हाल ही में अधिसूचित ईईजेड नियम, 2025 और समुद्री मत्स्य पालन दिशानिर्देश, 2025 टूना और टूना जैसी प्रजातियों जैसे उच्च मूल्य वाले समुद्री संसाधनों की जिम्मेदारीपूर्वक दोहन के लिए एक मजबूत ढांचा प्रदान करते हैं.
लगभग 3 करोड़ मछुआरों और मछली किसानों की आजीविका को सहारा देने में मछली पालन क्षेत्र की भूमिका पर जोर देते हुए समग्र सरकारी दृष्टिकोण अपनाने और राज्य सरकारों तथा मत्स्य पालन हितधारकों के बीच सहयोग को मजबूत करने का आह्वान किया.
उन्होंने मत्स्य पालन मूल्य श्रृंखला को मजबूत करने और इस क्षेत्र के समावेशी विकास को सुनिश्चित करने में मत्स्य पालन सहकारी समितियों और मछली किसान उत्पादक संगठनों (एफएफपीओ) की महत्वपूर्ण भूमिका पर भी प्रकाश डाला.










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