नई दिल्ली. पोल्ट्री फार्मिंग के काम में कई बातों का ध्यान रखना जरूरी होता है. उसी में से एक सबसे अहम ये है कि पोल्ट्री बर्ड का आहार प्रबंधन किस तरह से किया जाए. एक्सपर्ट कहते हैं कि अगर आहार प्रबंधन में लापरवाही की जाती है तो फिर इससे पोल्ट्री बर्ड का उत्पादन सबसे ज्यादा प्रभावित होता है. अगर उत्पादन से बात आगे बढ़ जाए तो उनके स्वास्थ्य पर भी इसका असर पड़ता है. अंडों के लिए पाली गई लेयर मुर्गियों से अंडे कम मिलते हैं. जबकि मीट उत्पादन के लिए पाले जा रहे ब्रॉयलर मुर्गों का वजन नहीं बढ़ता है. इससे पोल्ट्री फार्मिंग के काम में नुकसान होना तय है.
आपको बता दें कि पोल्ट्री फार्मिंग के काम में 65 से 70 फीसद तक का खर्च सिर्फ और सिर्फ आहार यानी फीड पर होता है. इसलिए हमेशा ही में ऐसा फीड देना चाहिए जो मुर्गे मुर्गियों के लिए जरूरी है. ताकि आपको पोल्ट्री फार्मिंग के काम में नुकसान ना हो. कई बार गलत फीड देने से पोल्ट्री फार्मिंग की लागत बढ़ सकती है और नतीजे में उत्पादन बेहतर नहीं मिलता है.
कब किस तरह का फीड दे चाहिए
पोल्ट्री एक्सपर्ट कहते हैं कि अगर अंडा उत्पादन करने के लिए पोल्ट्री बर्ड को पाल रखा है तो उन्हें कैल्शियम, फास्फोरस और विटामिन डी से भरपूर संतुलित आहार देना चाहिए.
अगर आप कैल्शियम फास्फोरस और विटामिन डी से भरपूर संतुलित आहार देते हैं तो इससे अंडों की संख्या बढ़ेगी जबकि अंडों का छिलका भी मजबूत होगा.
बात अगर ब्रॉयलर मुर्गों करें, जिनसे आपको मीट का उत्पादन मिलता है तो उन्हें उच्च प्रोटीन वाला आहार देना चाहिए. ताकि उनका वजन समय से बढ़ता चला जाए.
आपको बता दें कि पौष्टिक आहार पोल्ट्री बर्ड की रोग प्रतिरोधक क्षमता को भी मजबूत करता है. जिससे बर्ड फ्लू, रानीखेत जैसी खतरनाक बीमारियों से वो सुरक्षित रहते हैं.
अगर आप पोल्ट्री बर्ड को संतुलित आहार देते हैं तो उनका पाचन तंत्र भी ठीक रहता है. जिससे खा गए दाने को वो मीट और अंडे में बेहतर तरीके से बदल पाते हैं. जबकि चारे की बर्बादी भी कम होती है.
पोल्ट्री फार्मिंग में जब मौसम बदलता है या मुर्गे-मुर्गियों को जब परिवहन या टीकाकरण के दौर से गुजरना है तब वो तनाव में आ जाते हैं. तब उन्हें इलेक्ट्रोलाइट और विटामिन सी से भरपूर सप्लीमेंट भी देना चाहिए.
यदि आप इन चीजों को करते हैं तो पोल्ट्री फार्मिंग में आपको नुकसान नहीं होगा और हर तरह से आप फायदे में रहेंगे.












Leave a comment