नई दिल्ली. पोल्ट्री फार्मिंग में सोनाली मुर्गी पालकर अच्छा मुनाफा कमाया जा सकता है. हालांकि इसके लिए भी फार्म की जरूरत है, लेकिन एक्सपर्ट कहते हैं कि सोनाली मुर्गियों के साथ पोल्ट्री फॉर्मिंग करने के लिए अस्थायी (Temporary) शेड बनाया जा सकता है. क्योंकि ये सस्ता होता है और इसे बनाना भी आसान होता है. एक्सपर्ट की मानें तो प्रभावी शेड कम खर्च में अधिक उत्पादन की कुंजी होता है. यदि आप सोनाली मुर्गी पाले हुए हैं या पालना चाहते हैं तो आपको मालूम होना चाहिए कि किफायती शेड कैसे बनाया जाता है.
एक्सपर्ट का कहना है कि शेड की छत को घास-फूस, ताट, प्लास्टिक शीट या टिन-शीट लगाएं. शेउ का तापमान कम रखें ताकि बारिश से सुरक्षा हो. इसकी ऊंचाई (Height) की बात की जाए तो साइड 6-7 फीट बीच की ऊँचाई 8-10 फीट हवादार एवं ठंडी हवा का प्रवाह बना रहे.
शेड को बांस से बनाएं
बाड़ या दीवार (Side Wall) 1-2 फीट तक ईंट या बांस की बनाएं. ऊपर से 4-5 फीट तक जाली (Net) लगाएं. ताकि हवा और शिकारी जानवरों से सुरक्षा हो सके.
अच्छी वेंटिलेशन (हवादार व्यवस्था) होनी चाहिए. इससे धूप व गर्मी से सुरक्षा होती है. साथ ही बारिश, हवा और शिकारी से सुरक्षा होती है.
100 पक्षियों के लिए शेड की लंबाई 20-25 फीट रखें.
चौड़ाई 10-12 फीट रखना चाहिए.
क्षेत्रफल की बात करें तो 200-250 वर्ग फीट हो.
फ्लोर (Floor) उच्च स्थान पर बनाएं. फ्लोर कंक्रिट या मिट्टी का हो और ऊपर 2-3 इंच सूखा होना चाहिए.
शेड की दिशा (Direction) में मुंह पूर्व-पस्चिम में रखें. ताकि धूप सीधी अंदर न आए और हवा का अच्छा प्रवाह बना रहे.
शेड निर्माण के लिए सामग्री के तौर पर बांस, लकड़ी के खंभे आदि इस्तेमाल करें.
दरवाजा मजबूत और बंद होने वाला बनाना चाहिए.
आवश्थक उपकरण के तौर पर फीडर, ड्रिंकर, ब्रूडर/बल्ब छोटे चुजों के लिए होना चाहिए.
थर्मामीटर भी जरूरी होना चाहिए. साफ-सफाई के उपकरण को भी रखें.
अच्छे अस्थायी रोड के फायदे क्सा हैं
चारे का बेहतर उपयोग अच्छे से होता है. कम खर्च में अधिक लाभ मिलता है.
चावल के भूसा, लकड़ी की भूसी, मूंगफली की भूसी या धान का भूसा उपयोग करें.
नमी होने पर बदलें और सूखा रखें. हर 15-20 दिन बाद पलटें.
ध्यान रखने योग्य बातें ये हैं कि शेड हमेशा साफ, सुखा और हवादार रखें.
नियमित रूप से ब्लीच/चुना छिड़काव करें. चूजों को ठंडी, गर्मी, बारिश और शिकारी
जानवरों से बचाएं.
पानी हमेशा साफ और पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध हो.
इससे अंडा उत्पादन में वृद्धि होता है.












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