Home डेयरी Dairy: डिटर्जेंट और यूरिया मिलाकर बना रहे पनीर, जांच करने पर नमूनों में मिली 97 फीसद तक मिलावट
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Dairy: डिटर्जेंट और यूरिया मिलाकर बना रहे पनीर, जांच करने पर नमूनों में मिली 97 फीसद तक मिलावट

पनीर असली है या नकली इसकी पहचान करने का सबसे पहला तरीका यह है कि पनीर के टुकड़े को हाथों से मसलकर देखें.
प्रतीकात्मक फोटो

नई दिल्ली. राजस्थान की राजधानी जयपुर में लोगों की जिंदगी से खिलवाड़ किया जा रहा है. स्वाद के चक्कर में लोग मिलावटी प्रोडक्ट खा रहे हैं. जो उनके लिए नुकसानदेह है. असल में शादी समारोहों, ढाबों, रेस्तरां और फास्ट फूड सेंटरों में बड़े स्तर पर ‘कृत्रिम पनीर की खपत हो रही है. ये बात हम यूं ही नहीं कह रहे हैं दरअसल, शहर में ही मार्च-अप्रैल में 700 से 1000 किलो तक नकली पनीर की कई खेप पकड़ी गई है. 2025-26 के आंकड़ों के अनुसार, दूध और पनीर के नमूनों में 97 प्रतिशत तक मिलावट पानी, डिटर्जेंट और यूरिया की पाई गई है.

राजधानी में पनीर की सैकड़ों अवैध यूनिट है. पिछले साल स्वास्थ्य विभाग ने राज्यभर में 3,915 से अधिक कानूनी मामले दर्ज किए हैं. इनमें पनीर सहित दूध उत्पादों के हजारों नमूनों का परीक्षण किया गया, जिनमें बड़ी संख्या असुरक्षित पाई गई है. पनीर के 70 प्रतिशत से अधिक सैपल फेल पाए गए, जिनमें पाम ऑयल और स्टार्च की मिलावट सामने आई. जयपुर और आसपास के इलाकों में मिलावटी पनीर मुख्य रूप से हरियाणा की सीमा (मेवात क्षेत्र) से जयपुर, जोधपुर और अलवर में सप्लाई हो रहा है.

असली-नकली पनीर में अंतर
असली पनीर दूध को फाड़कर तैयार किया जाता है, जिसमें प्राकृतिक प्रोटीन, कैल्शियम और फैट मौजूद रहता है.

कृत्रिम पनीर में दूध की मात्रा बेहद कम या कई बार बिल्कुल नहीं होती. इसे सिंथेटिक फैट, पाम ऑयल, स्टार्च, स्किम्ड पाउडर, डिटर्जेंट और सफेदी बढ़ाने वाले रसायनों से तैयार किया जाता है.

कई जगह इसे सख्त बनाने के लिए रबर जैसी बनावट देने वाले पदार्थ भी मिलाए जाते हैं.

कृत्रिम पनीर देखने और स्वाद में असली जैसा लगता है, इसलिए उपभोक्ता आसानी से पहचान नहीं कर पाता है.

चिंताजनक बात यह है कि इस कारोबार पर रोक लगाने के बजाय अधिकतर मामलों में केवल जुर्माना लगाकर कार्रवाई पूरी मान ली जाती है.

इससे नकली पनीर बनाने और बेचने वालों के हौसले बुलंद हैं. प्रदेश में फूड सेफ्टी विभाग की जांचों में कई लाइसेंसधारी भी हैं.

जबकि बिना लाइसेंस सैकडों यूनिट शहरों और कस्बों के बाहरी इलाकों में संचालित होने की आशंका है. खुद फूड कमिश्नरेट के पास भी इस नेटवर्क का सटीक आंकड़ा नहीं है.

निष्कर्ष
एक्सपर्ट का कहना है कि जिस तरह का पनीर बाजार में उपलब्ध कराया जा रहा है. ये बहुत ही नुकसान पहुंचाने वाला है. इसलिए बेहद ही जरूरी है कि नकली पनीर बनाने वालों पर सख्त कार्रवाई की जाए.

Written by
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