नई दिल्ली. बकरी को गरीब और लघु किसानों की गाय कहा जाता है. कई राज्यों में बड़े पैमाने पर बकरी पालन होता है. बकरी पालकर अब सिर्फ मीट से ही कमाई नहीं होती है बल्कि दूध भी खूब बिकता है. खासतौर पर डेंगू बुखार के सीजन में तो बकरी का दूध अमृत बन जाता है. प्लेटलेट्स काउंट को बढ़ाने में बहुत ही मददगार होता है. बकरी पालकर किसान अच्छी कमाई कर सकते हैं. बकरी पालन में अच्छी बात ये है कि किसान अपने घर पर भी पाल सकते हैं. इसके लिए बहुत ज्यादा खर्च करने की जरूरत नहीं है.
बकरी पालने के लिए अगर शेड वगैरह बनाया जाए तो ये काफी उपयोगी हो सकता है. शुरू में किसान 5 से 10 बकरी से भी इस व्यवसाय की शुरुआत कर सकते हैं. बकरी पालन करने के लिए देश में बहुत सी नस्ले हैं जिनका चुनाव गोट फार्मर द्वारा किया जा सकता है लेकिन सुरती, कच्छी और मेहसाणा बकरी पालन भी फायदे का सौदा है. इसमें से दो बकरियां तो दो तरह से कमाई करवाती हैं. मतलब उनका मीट और दूध दोनों ही बेचकर अच्छी खासी कमाई की जा सकती है. आइए जानते हैं.
सुरती नस्ल की बकरी: सुरती बकरी भारत में घरेलू बकरियों की एक महत्वपूर्ण नस्ल है. इसे डेयरी बकरी की नस्ल कहा जाता है. इसका पालन मुख्य रूप से दूध उत्पादन के लिए किया जाता है. सुरती बकरी भारत में सबसे अच्छी डेयरी बकरी नस्लों में से एक मानी जाती है. इस नस्ल का नाम भारत के गुजरात राज्य में ‘सूरत’ नामक स्थान से निकला है. इस क्षेत्र में नस्ल शुद्ध रूप में पाई जाती है, लेकिन अन्य बकरी नस्लों की तुलना में इस नस्ल की कुल आबादी बहुत कम है और यह भारतीय मूल की बकरियों की लुप्तप्राय नस्लों में से एक है. सुरती बकरियां छोटे से मध्यम आकार के जानवर होते हैं जिनका शरीर खुशबूदार होता है.
कच्छी बकरी पालन: कच्छी बकरी (जिसे काठियावाड़ी भी कहा जाता है). भारत के गुजरात राज्य की घरेलू बकरी की एक महत्वपूर्ण नस्ल है. यह एक दोहरे उद्देश्य वाली नस्ल है और मांस और दूध उत्पादन दोनों के लिए उगाई जाती है. इस नस्ल को गुजरात के कच्छ जिले की मूल निवासी माना जाता है. कच्छी बकरी की नस्ल का नाम ‘कच्छ’ जिले के नाम पर रखा गया है. उत्तरी गुजरात का कच्छ जिला इस बकरी की नस्ल का प्राकृतिक आवास है. हालांकि बकरियां कच्छ क्षेत्र के अलावा दक्षिणी राजस्थान के आस-पास के क्षेत्रों में भी पाई जाती हैं.
मेहसाणा नस्ल की बकरी: मेहसाणा बकरी घरेलू बकरी की दोहरे उद्देश्य वाली नस्ल है. जिसे मुख्य रूप से मांस और दूध उत्पादन के लिए पाला जाता है. नस्ल की उत्पत्ति भारत के गुजरात राज्य से हुई है और यह मूल स्थान में एक महत्वपूर्ण नस्ल है. आश्चर्य की बात नहीं है कि मेहसाणा बकरी की नस्ल का नाम गुजरात में ‘मेहसाणा’ नामक मूल स्थान से लिया गया है. इस क्षेत्र में अपने सबसे शुद्ध रूप में पाई जाती है. मेहसाणा बकरी व्यापक रूप से बनासकांठा, पालननूर, गांधी नगर, अहमदाबाद और आसपास के इलाकों में फैली हुई है.
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