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Government Scheme: इस चारा फसल की खेती के लिए सरकार देती लोन, मिलता है दोहरा फायदा

पशुपालन में हरा चारा बेहद जरूरी होता है.
प्रतीकात्मक फोटो.

नई दिल्ली. गर्मी का महीना चल रहा है और इस दौरान हरे चारे की क्राइसिस है. हरा चारा न मिल पाने की वजह से किसानों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है. पशुओं के लिए पौष्टिक हरा चारा न मिलने से इसका असर उत्पादन में भी पड़ता है. हालांकि अगर किसान चरी की फार्मिंग करें तो इससे उन्हें डबल फायदा हो सकता है. एक तो इस फसल को बेचकर वह अच्छी कमाई कर सकते हैं और दूसरा अपने पशुओं को भी पौष्टिक चारी के तौर पर खिला सकते हैं.

पशु एक्सपर्ट का कहना है कि चारी की खेती किसानों के लिए बहुत मुफीद है किसान हरे चारे के रूप में बड़े परिवारों पर इसकी खेती करके हजार रुपए प्रतिदिन तक कमा सकते हैं. दरअसल चरी का चारा जब पशु खाता है तो इसके खाने से दूध उत्पादन में वृद्धि होती है. यानी पशु जितना दूध उत्पादित करता है, अगर इस चारे खाने लगे तो और ज्यादा दूध देने लगता है. इसके अलावा कई तरह की बीमारियों से भी बचाने में यह चारा कारगर साबित होता है.

कैसे करें बुवाई यहां पढ़ें
एक्सपर्ट कहते हैं कि इसी खासियत यह है कि इसका तन मोटा होता है और इसमें ज्यादा रस होता है. यही वजह है कि ज्यादा समय तक हरा रहता है. पूरा चरी संकर 109 बहु कटाई वाली शंकर किस्म है. जो 60 दिनों में पहली कटाई के लिए तैयार हो जाती है. इसमें कई बीमारियों से लड़ने की क्षमता है. बुवाई के दौरान छोटे दाने वाली किस्म के लिए बीज दर 10 से 12 किलोग्राम हेक्टेयर रखी जा सकती है. किसान जब बुवाई करें तो पंक्ति से पंक्ति की दूरी 25 सेंटीमीटर तक रख सकते हैं. पौधे से पौधे की दूरी 10 से 12 सेंटीमीटर रखनी चाहिए. बुवाई के लिए बीच की गहराई 1.5 से 2.0 सेंटीमीटर बढ़िया मानी जाती है.

अनुदान के लिए इन दस्तावेजों की होती है जरूरत
बता दे कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश के किस चारी की फसल बड़े पैमाने पर खेती करते हैं. जिससे उन्हें काफी फायदा होता है. क्योंकि बहुत से पशुपालक इस चरी को खरीद कर उनसे ले जाते हैं और अपने पशुओं को खिलाते हैं. इसलिए किसानों को खूब फायदा मिलता है. यहां आपको यह भी बता दें कि चरी की खेती करने के लिए सरकार भी मदद करती है अगर कोई किसान चरी की खेती करना चाहता है तो 40 फीसदी तक का अनुदान सरकार की ओर से मिलता है. इसके लिए बस किसानों को अपना आधार कार्ड, बैंक पासबुक, खतौनी के साथ कृषि रक्षा इकाई केंद्र पर संपर्क करना होगा और फिर अनुदान मिल जाएगा.

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