Home सरकारी स्की‍म Scheme: इस राज्य में सरकार ने लाखों किसानों को 200 करोड़ रुपए की दी मदद, चल रहीं हैं ये भी योजनाएं
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Scheme: इस राज्य में सरकार ने लाखों किसानों को 200 करोड़ रुपए की दी मदद, चल रहीं हैं ये भी योजनाएं

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प्रतीकात्मक तस्वीर

नई दिल्ली. पशुपालन को बढ़ावा देने के लिए सरकार कई प्रयास कर रही है. राजस्थान सरकार की ओर भी कोशिशें की जा रही हैं, ताकि पशुपालन को बढ़ावा दिया जा सके और किसान इससे अपनी आमदनी दोगुनी कर सकें. एनिमल एक्सपर्ट का भी ये मानना है कि पशुपालन करके किसान अपनी आर्थिक स्थिति को सुधार सकते हैं. यही वजह है कि सरकार भी इसमें मदद कर रही है. राजस्थान में कई योजनाएं चल रही हैं, जिसकी मदद से किसानों की आर्थिक स्थिति को सुधारने का काम किया जा रहा है. मुख्यमंत्री ने अजमेर में आयोजित किसान सम्मेलन में 200 नए बल्क मिल्क कूलर्स, 1000 नए डेयरी बूथ को आवंटन पत्र, गोपाल क्रेडिट कार्ड योजना के अंतर्गत 20 हजार गोपालकों को एक लाख रुपये तक का ब्याज मुक्त ऋण प्रदान करने के साथ साथ 1000 नए दूध संकलन केंद्रों की शुरूआत भी की है.

वहीं 100 गौशालाओं को गौकाष्ठ मशीन उपलब्ध करवाने के कार्य का शुभारंभ किया. सम्मेलन में प्रदेश के तीन लाख 25 हजार पशुपालकों को 5 रुपये प्रति लीटर के आधार पर 200 करोड़ रुपये की सहायता राशि भी डीबीटी के माध्यम से हस्तांतरित की है. गौशालाओं में संधारित पशुओं के लिए दिए जाने वाले अनुदान में भी 10 प्रतिशत की बढ़ोतरी की गई है.

गोकुल मिशन के तहत आए कई वाहन
राष्ट्रीय गोकुल मिशन योजना के तहत तरल नाइट्रोजन वितरण व्यवस्था को आसान बनाने का काम किया जा रहा है. तमाम जिला स्तरीय कार्यालयों को 20 तरल नाइट्रोजन परिवहन वाहन उपलब्ध कराए गये हैं. तरल नत्रजन पशु नस्ल सुधार के लिए किए जाने वाले कृत्रिम गर्भाधान में काम आता है. इन वाहनों में पहली बार जारों को उठाने और रखने के लिए पूली व्यवस्था करवाई गई है जिससे विभागीय कर्मचारियों को अधिक वजन उठाने की समस्या से मुक्ति मिलेगी. साथ ही जार के खराब होने की संभावना भी कम रहेगी. तरल नत्रजन के भण्डारण व्यवस्था को सुदृढ़ बनाए जाने के लिए वाहन आपूर्ति के अतिरिक्त जरूरत के मुताबिक राज्य के 29 जिलों में 3000 लीटर क्षमता के नए साइलों की भी स्थापना हो चुकी है.

सभी जिलों में आयोजित होंगे पशु मेले
राजस्थान में मौजूदा वक्त में में 7 जिलों में 10 पशु मेलों का आयोजन प्रति वर्ष किया जाता है. इससे सुदूर क्षेत्रों और दूरस्थ जिलों के पशुपालकों को असुविधा होती है और वे इन मेलों में भाग लेने से वंचित रह जाते हैं. पशुपालकों की सुविधा और पशुपालन को व्यवसाय के रूप में स्थापित करने के दृष्टिकोण से चरणबद्ध रूप से सभी जिलों में पशु मेले आयोजित करने की घोषणा बजट में की गई है. पहले वर्ष में उदयपुर, जोधपुर, बीकानेर, झुंझुनू, चुरू, जैसलमेर, राजसमन्द, पाली, सिरोही, जयपुर एवं जालौर सहित कुल 11 जिलों में पशु मेले आयोजन के लिए प्रशासनिक एवं वित्तीय स्वीकृति जारी कर दी गई है. इससे निश्चित रूप से बड़ी संख्या में पशुपालकों को फायदा होगा.

Written by
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