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क्यों बकरी को पक्के फर्श पर नहीं पालना चाहिए, इसका क्या है नुकसान, जान लें यहां

goat farming for milk
बरबरी बकरी की प्रतीकात्मक तस्वीर.

नई दिल्ली. ये बात साबित कि पोल्ट्री के मुकाबले बकरे-बकरियों में जल्दी कोई बीमारी घर नहीं करती है. इनमें न तो बर्ड फ्लू की तरह से कोई ऐसी बीमारी फैलती है कि न ही कोई और. जिसकी वजह से बकरे-बकरियों को मार कर दफना दिया जाए. हालांकि इसके बावजूद यदि बकरी पालक बकरी पालन के जरिए अच्छा मुनाफा कमाना चाहता है तो कभी भी बकरियों को पक्के फर्श पर न पालें. जबकि मौसम के हिसाब से उनके शेड ठंडक और गर्माहट का इंतजाम बकरी पालक को करना चाहिए. एक्सपर्ट का मानना है कि ऐसा करने से जहां बकरियां ज्यादा दूध देंगी तो मीट के लिहाज से बकरे भी तंदरुस्त बनेंगे, ऐसे में जाहिर है कि उन्हें फायदा मिलेगा.

क्यों पक्के फर्श पर बकरे-बकरी नहीं पालना चाहिए

इस संबंध में बुलंदशहर में गोट फार्मिंग करने वाले मुनेन्द्रे चौधरी कहते हैं कि बकरे और बकरी को जब भी निमोनियां होता है या फिर ठंड लगती है और जुकाम होता है तो ये उसके चेस्ट में ठंड लगने के कारण ही होता है. यदि फर्श पक्का है तो ठंड लगने का खतरा कई गुना बढ़ जाता है. जब सीना फर्श से लगता है तो फिर बकरी के शेड में हीटर या दूसरी चीजों से कितनी भी गर्मी कर लो, या उन्हें गर्म कपड़े पहना दो उन्हें सर्दी लगेगी ही. अगर चाहते हैं कि बकरी को ठंड न लगे तो उन्हें कच्ची् जमीन पर रखा जाना चाहिए. वो ​कहते हैं कि कच्ची जमीन इसलिए भी जरूरी है कि बकरे-बकरी जब यूरिन करें तो वो मिट्टी में सूख जाए. उसके अंदर चला जाए. दरअसल, बकरी के यूरिन से गैस निकलती हैं जो डेढ़ से दो फीट की ऊंचाई तक असर छोड़ती हैं.

ऐसे में बकरे-बकरी सांस लेने के लिए ताजी हवा इन्हेंल करते हैं तो उसके साथ ही तमाम तरह की बीमारी उन्हें जकड़ लेती हैं. इस बात भी ख्याल रखना चाहिए कि बकरी के शेड में सुबह की गई मेंगनी को हर हाल में दोपहर तक और दोपहर की मेंगनी देर शाम तक साफ कर देना चाहिए था. जबकि बकरे-बकरी जो मेंगनी रात में करें तो उन्हें सुबह होते ही साफ करना चाहिए. ऐसा करने से शेड में साफ-सफाई भी हो जाएगी और बकरे-बकरियों को पॉजिटिव एनर्जी भी मिलती रहेगी. इसके साथ ही अच्छे से यहां-वहां घूम फिर सकेंगे. इसके अलावा खास बात यह कि इस मेंगनी को इकट्ठा कर आप बेच सकते हैं और अगर आपके शेड में 100 बकरियां हैं तो एक महीने में एक ट्रॉली भरकर मेंगनी जमा हो जाती है जो गांव में एक हजार रुपये तक की बेची जा रही है.

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