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Animal News: हैल्दी और बीमार पशुओं की क्या है पहचान, जानें यहां

दुधारू गाय व भैंस के ब्याने व उसके बाद सतर्क रहने की आवश्यकता है.
साहीवाल गाय की प्रतीकात्मक फोटो.

नई दिल्ली. पशुपालन कर रहे हैं तो आपको हैल्दी और बीमार पशु की पहचान करना आनी चाहिए. यदि पहचान नहीं आएगी तो फिर पशुपालन में नुकसान हो सकता है. पशुपालन करने वाले एक्सपर्ट का कहना है कि प्राकृतिक आदतों में ही पशुओं के फिट रहने का संकेत छिपा हुआ है. जबकि पशु बीमार होने वाला होता है तब भी कुछ न कुछ संकेत देता है. बस जरूरत इसी बात की है कि इस संकेत को पहचान लिया जाए और पशु को बीमार होने से रोक लिया जाए. ताकि पशुपालन के काम में नुकसान न उठाना पड़े.

बिहार सरकार के डेयरी, मत्स्य एवं पशु संसाधन विभाग (Dairy Fisheries and Animal Resources Department) के एक्सपर्ट की ओर से लाइव स्टॉक एनिमल न्यूज (Livestock Animal News) को इस बारे में हम अहम जानकारी दी गई. जिसके बारे में हम यहां आपको बताने जा रहे हैं. जो हर एक पशुपालन के लिए बेहद ही अहम जानकारी है.

लार की मात्रा
आहार के प्रकार के मुताबिक एक पशु में हर दिन औसतन 40-150 लीटर लार बनती है.

सूखा चारा लार के उत्पादन को बढ़ाते हैं. जबकि ज्यादा दाना युक्त आहार लार उत्पादन को कम कर देता है.

लार का ज्यादा उत्पादन, लार का मुंह से गिरना और मुंह से झाग निकलना स्वास्थ्य के लिए खतरे का संकेत हैं.

इसके संभावित कारण सूखे चारे का ज्यादा उपयोग, मुंह, जुबान में छाले, खुरपका, मुँहपका रोग, जहर खुरानी, रेबीज आदि हो सकते हैं.

जुगाली
एक स्वस्थ पशु प्रतिदिन 7-10 घंटे तक 5-25 चक्र में जुगाली करता है और प्रत्येक चक्र 10-60 मिनट का होता है.

जुगाली करते समय पशु खाने को 45-60 सेकेंड में 40-70 बार चबाता है.

जुगाली में कमी आना स्वास्थ्य के लिए खतरे का संकेत हैं.

सांस की दर
वयस्क पशुओं में सांस की सामान्य दर 10-30 बार और बछड़े और बछियों में 30-50 बार प्रति मिनट होती है.

बुखार, गर्मी से उत्पन्न तनाव, दर्द या उत्तेजना की स्थिति में सांस दर में ग्रोथ हो जाती है.

स्किन
पशु की त्वचा चमकदार, साफ एवं मुलायम होनी चाहिए. उसपर फोड़े, फुंसी या जुए नहीं होनी चाहिए.

स्किन का बदरंग होना खनिज लवण की कमी और त्वचा का रुखी, खुरदरी होना कीड़ों के प्रकोप का संकेत है.

Written by
Livestock Animal News Team

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