नई दिल्ली. मुर्गियों में ओवेरियन फॉलिकल्स (Ovarian Follicles) अंडाशय (Ovary) में मौजूद गोल, पीले रंग की थैली जैसी बनावट होती हैं. एक्सपर्ट कहते हैं कि जिनमें अंडे की जर्दी (Yolk) या अंडाणु विकसित होते हैं. आमतौर पर ये बनाटव मुर्गी के बाएं अंडाशय में ये फॉलिकल्स अंगूर के गुच्छे की तरह व्यवस्थित होते हैं. बताते चलें कि इनका आकार छोटे बिंदुओं से लेकर पूरी विकसित जर्दी तक भी होता है. इतना पढ़कर आप समझ गए होंगे कि अंडों के उत्पादन के लिए किए जा रहे मुर्गी पालन में इसका अहम रोल है. कई बाद इसमें कुछ दिक्कतें भी होती हैं. इससे अंडा उत्पादन प्रभावित होता है.
पोल्ट्री एक्सपर्ट का कहना है कि कुछ मुर्गियों में ओवेरियन फॉलिकल्स का क्रम सामान्य और सुव्यवस्थित होने के बजाय अव्यवस्थित होता है. यह पैटर्न ‘एग-योक पेरिटोनाइटिस’ से जुड़ा है, जिसमें निकला हुआ योक ओविडक्ट (अंडवाहिनी) के बजाय शरीर की कैविटी में चला जाता है. ऐसा होने के पीछे कई वजह भी है और इसे सही भी किया जा सकता है.
कभी भी न करें ये लापरवाही
पोल्ट्री एक्सपर्ट की मानें तो कई बार ये बायोसिक्योरिटी में बरती गई लापरवाही के कारण भी होता है.
वहीं पोल्ट्री फार्मर द्वारा टीकाकरण और लगातार लाइटिंग में की गई लापरवाही के चलते भी हो सकता है.
वहीं फीडिंग शेड्यूल का इस्तेमाल करके इन समस्याओं को बढ़ाने वाले ज्ञात कारणों को कम किया जाता है.
हालांकि एक्सपर्ट के मुताबिक ये उपाय बाहरी जोखिम कारकों पर काम करते हैं, न कि उस आंतरिक हार्मोनल संतुलन पर. ये फॉलिकल्स के व्यवस्थित विकास को नियंत्रित करता है.
यह देखा गया है कि AMPK-आधारित सिग्नलिंग, रिप्रोडक्टिव हार्मोन के प्रति ग्रैनुलोसा सेल की प्रतिक्रिया को इस तरह से नियंत्रित करती है.
जो मुर्गियों में फॉलिकल के आकार के अनुसार बदलती रहती है. संक्रमण और मैनेजमेंट से जुड़े ज्ञात जोखिम कारकों के साथ-साथ, इस प्रतिक्रिया में कमी को फॉलिकल्स के अव्यवस्थित होने का एक संभावित आंतरिक कारण माना गया है.
बतााते चलें कि ब्रॉयलर ब्रीडर मुर्गी के पोस्टमार्टम के दौरान ओवेरियन फॉलिकल्स का अव्यवस्थित क्रम देखा गया है.
जिसमें फॉलिकल्स का आकार और परिपक्वता (मैच्योरिटी) सामान्य और सुव्यवस्थित क्रम के बजाय अनियमित थी.
आपको यहां ये भी बता दें कि फॉलिकल का मुख्य काम अंडे की जर्दी का निर्माण करना और परिपक्व होने पर अंडाणु (Ovum) को अंडवाहिनी (Oviduct) में भेजना है, जिससे आगे चलकर पूरा अंडा बनता है.












