नई दिल्ली. अगर आप मुर्गी पालक हैं तो खबरदार हो जाइए. क्यों जो महीना चल रहा है और जो आने वाला है, उसमें मुर्गियों पर बड़ा खतरा मंडरा रहा है. क्योंकि मुर्गियों को इन दोनों महीनों में मुख्यता तीन बीमारियों का खतरा सबसे ज्यादा रहता है. इन बीमारियों में सीआरडी, कॉक्सिडोसिस और रानीखेत खेत हैं. ये तीनों ही बीमारियां ही खतरनाक हैं. जिससे मुर्गी पालन में बड़ा नुकसान हो सकता है. इसलिए इस रिपोर्ट में हम आपको इन बीमारियों से बचाव का तरीका भी बताएंगे. इसलिए इस रिपोर्ट को गौर से और आखिर तक पढ़ें.
सीआरडी (Chronic Respiratory Disease / क्रॉनिक रेस्पिरेटरी डिजीज) में मुर्गियों को सांस लेने में तकलीफ होती है. मुंह खोलकर सांस लेती हैं और सांस लेते समय घरघराहट या खरखर की आवाज आती है. जबकि आंख और नाक से पानी बहना, आंख और चेहरे पर सूजन आना, दाना-पानी कम खाना और सुस्त होकर बैठे रहना भी लक्षण है.
बीमारियों के बारे में जानें यहां
बचाव के लिए ठंड के समय शाम होते ही पर्दे गिरा दें ताकि सीधी ठंडी हवा न लगे, लेकिन वेंटिलेशन के लिए ऊपर से खुला रखें ताकि अमोनिया गैस न बने.
सुबह और शाम मुर्गियों को गुनगुना पानी पीने के लिए दें. ठंडा पानी बिल्कुल न दें.
बिछावन (धान की भूसी या लकड़ी के बुरादे) को दिन में दो बार उलट-पुलट (रेकिंग) करें और गीला होने पर तुरंत बदलें.
शाम के समय हरा चारा (पत्तागोभी, मूली या सहजन के पत्ते आदि) न दें, यदि देना हो तो दोपहर में दें.
नजदीकी पशु चिकित्सक (वेटरनरी डॉक्टर) से सलाह लें और लगातार 3 दिनों तक दिन में एक बार पानी में मिलाकर मुर्गियों को पिलाएं.
कॉक्सिडोसिस (Coccidiosis) के लक्षण की बात करें तो मुर्गियों लाल रंग की बीट करती हैं. पंख फैलाकर कोने में झुंड बनाकर बैठी रहती हैं.
बचाव के लिए बिछावन को हमेशा सूखा और साफ रखें धान की भूसी या बुरादा गीला होते ही उसे तुरंत बदल दें.
सड़ा-गला दाना बिल्कुल न दें और हमेशा ताजा व साफ पानी दें. पशु चिकित्सक से सलाह लेकर तुरंत इलाज शुरू करें.
रानीखेत (Ranikhet / Newcastle Disease) के लक्षण की बात करें तो गर्दन टेढ़ी होना या मुड़ जाना है.
हरे रंग की बदबूदार बीट आना, दाना-पानी छोड़ देना, सुस्त हो जाना और बहुत तेजी से मुर्गियों की मौत होना. यह बीमारी बहुत तेजी से पूरे फार्म में फैलती है.
बचाव के लिए समय पर रानीखेत के सभी टीके (वैक्सीन) लगवाएं.
बायोसिक्योरिटी का पूरा ध्यान रखें. शेड के बाहर गमले में पोटाश पानी या डिसइन्फेक्टेंट (जैसे कोहर्सोलिन या B-904) रखें और पैर डुबोकर ही अंदर जाएं.
बाहरी लोगों और अन्य जानवरों को अंदर न आने दें और शेड में हफ्ते में 1–2 बार डिसइन्फेक्टेंट का छिड़काव करें.
लक्षण दिखते ही बीमार मुर्गी को तुरंत स्वस्थ मुर्गियों से अलग करें, पूरे शेड में कीटाणुनाशक का छिड़काव करें और तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें.












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