नई दिल्ली. बात जब पोल्ट्री फार्मिंग की आती है तो ज्यादातर लोग सिर्फ मुर्गी पालन के बारे में ही सोचते हैं जबकि एक ऐसा परिंदा भी है, जिसकी रोग प्रतिरोधक क्षमता (इम्यूनिटी) मुर्गियों से 10 गुना ज्यादा होती है और वह मुर्गियों से अधिक अंडे देने की क्षमता रखती है. हम बात कर रहे हैं बतख (Duck) पालन की. पोल्ट्री एक्सपर्ट कहते हैं कि बत्तख पालन की एक बेहतरीन काम है और इसमें अच्छी कमाई की जा सकती है. बताते चलें कि मुर्गी पालन में पक्के शेड, तापमान नियंत्रण, सर्दियों में हीटर और गर्मियों में फॉगर या पंखों पर भारी खर्च करना पड़ता है.
जबकि आप अगर बतख पालन करते हैं तो इसके लिए महंगे शेड की आवश्यकता नहीं होती. बत्तख पालक द्वारा साधारण छप्पर, बांस के बाड़े या नेट में भी इन्हें रखा जा सकता है. जबकि बतख पालन के लिए बहुत बड़ा तालाब होना अनिवार्य नहीं है, बल्कि एक छोटा गड्ढा या पानी का हौज भी पर्याप्त होता है.
बीमारियां और मृत्यु दर (Mortality Rate)
▶️ मुर्गियों में जोखिम की बात की जाए तो रानीखेत और बर्ड फ्लू जैसी बीमारियों से रातों-रात पूरा फार्म खाली होने का डर रहता है. जिसके लिए बार-बार वैक्सीन और एंटीबायोटिक देने पड़ते हैं.
▶️ बतखों की मजबूती की बात करें बतख की चमड़ी मोटी होती है और इम्यूनिटी बहुत मजबूत होती है, इसलिए इन्हें बार-बार वैक्सीन देने की जरूरत नहीं पड़ती.
▶️ मृत्यु दर की तुलना करें तो बतखों में मृत्यु दर 2 फीसद से भी कम होती है, जबकि मुर्गियों में यह 5 फीसद से 10 परसेंट तक पहुँच जाती है.
▶️ दाने (Feed) के खर्च की बात करें तो मुर्गियों का दाना लगभग 90 फीसद तक दाना बाजार से खरीदना पड़ता है, जिसके दाम लगातार बढ़ते रहते हैं.
▶️ बत्तखों का काम प्राकृतिक भोजन से चल जाता है. बतख पानी के कीड़े, घोंघे, मेंढक, बची-खुची फसलें, जूठन और सब्जियों के छिलके खा लेती है.
इन प्राकृतिक चीजों को बत्तख अपना 50 परसेंट पेट खुद भर लेती है, जिससे फीड का खर्च काफी कम हो जाता है.
▶️ खाकी कैंपबेल (Khaki Campbell) नस्ल की बतख साल में लगभग 300 से 330 अंडे देती है, जबकि एक अच्छी लेयर मुर्गी लगभग 280 से 300 अंडे देती है.
▶️ अंडे का वजन में तुलना करें तो बतख का अंडा 65–70 ग्राम का होता है जबकि मुर्गी के अंडे 50–55 ग्राम के होते हैं. बत्तख का अंडा 15–20 ग्राम भारी होता है.
▶️ बतख लगातार 2 से 3 साल तक बेहतरीन अंडा उत्पादन देती है, जबकि मुर्गियों का उत्पादन 1.5 साल के बाद काफी घट जाता है.
▶️ मुर्गियों के अंडे 6–10 रुपए में अगर बिकता है तो अधिक लागत के कारण प्रति अंडा 1 से 2 रुपए का ही मुनाफा बचता है.
▶️ वहीं बतख का अंडा बड़ा और पौष्टिक होने के कारण 10 से 15 रुपए तक बिक जाता है. इसलिए इसमें मुनाफा ज्यादा मिलता है.
▶️ बंगाल, दक्षिण भारत और पूर्वोत्तर राज्यों में बतख के अंडे और मांस की मांग काफी अधिक रहती है.
▶️ बतख पालन शुरू करने से पहले स्थानीय बाजार में उसकी मांग और रेट की जानकारी अवश्य कर लें.
निष्कर्ष
जिनके पास अच्छा बजट, देखभाल का पूरा समय और आसान बाजार पहुंच है, वे मुर्गी पालन कर सकते हैं. वहीं जो कम बजट, कम जोखिम और कम मेहनत में अधिक लाभ चाहते हैं, उनके लिए बतख पालन बेहतर विकल्प है.










