नई दिल्ली. उत्तर प्रदेश सरकार राज्य में महिलाओं को कमाई का जरिया देने की कोशिश में जुटी है. ऐसी महिलाएं जो घर में चूल्हा—चौका करती हैं, यदि वो चाहें तो बैकयार्ड पोल्ट्री फार्मिंग के जरिए अपनी कमाई का जरिया बना सकती हैं. जबकि घर के खर्च में हाथ भी बंटा सकती हैं. इस काम को शुरू करने में आने वाले खर्च पर उत्तर प्रदेश के पशुपालन विभाग की ओर से आर्थिक मदद भी दी जा रही है. जिससे वो इस काम को शुरू कर लें और अपनी आमदनी का एक जरिया बना लें. सरकार ने प्रदेश में इस तरह के हजारों पोल्ट्री यूनिट को खोलने का लक्ष्य रखा है.
उत्तर प्रदेश पशुपालन विभाग के उपनिदेशक (कुक्कुट-1) डॉ. बृजेश कुमार त्रिपाठी ने बताया कि सरकार की तरफ से बैकयार्ड पोल्ट्री योजना (Backyard Poultry Scheme) राज्य में चल रही है. इसका मकसद जहां उन्नत नस्लों (LIT Birds) को बढ़ावा देना है तो वहीं पोल्ट्री फार्मिंग में महिलाओं को आगे लाना भी है.
ग्रामीण स्तर पर कुक्कुट पालन को प्रोत्साहन देना
ये योजना मुख्य रूप से ग्रामीण क्षेत्रों में अनुसूचित जाति (SC) की गरीब वर्ग की महिलाओं के लिए चलाई जा रही है.
ताकि ग्रामीण परिवारों व बच्चों में कुपोषण दूर किया जा सके और प्रोटीन व पोषण स्तर को सुधार जा सके.
अंडा और मीट बिक्री से महिलाओं के लिए अतिरिक्त आमदनी व आजीविका का साधन बनाना भी योजना का लक्ष्य है.
योजना में लो इनपुट टेक्नोलॉजी वाली मुर्गियां दी जाती हैं, जो बहुत कम फीड खाकर भी अच्छा प्रोडक्शन करती हैं.
कठिन मौसम (विपरीत जलवायु) सह लेती हैं और शिकारी जानवरों से खुद को बचा सकने में फुर्तीली होती हैं.
इसमें केंद्रीय पक्षी अनुसंधान संस्थान, इज्जतनगर, बरेली द्वारा विकसित कैरी गोल्ड, कैरी देवेंद्रा और कैरी निर्भीक मुर्गियां शामिल हें.
जबकि वनराजा, गृहलक्ष्मी, कावेरी, कलिंगा ब्राउन, रेनबो रूस्टर व जलगांव विकसित किस्में को इस योजना में शामिल किया गया है.
प्रति इकाई लागत की बात करें तो तीन हजार रुपए आएगी. इसमें फार्मर को 50 चूजे जिए जाएं. साथ ही शुरुआती फीड भी दिया जाएगा.
जबकि मुर्गियों के लिए छप्पर (नाइट शेल्टर) आदि के निर्माण के लिए आर्थिक सहायता सरकार देगी.
अच्छी बात ये है कि लाभार्थियों को निःशुल्क प्रशिक्षण भी दिया जाएगा.
जबकि लाभार्थी के घर तक चूजे पहुंचाने का परिवहन का खर्च और जरूरी दवाएं भी दी जाएंगी.
निष्कर्ष
मौजूदा वक्त में प्रदेश में हर साल 16 हजार 666 इकाइयां स्थापित की जा रही हैं. शासन द्वारा इसे आगे बढ़ाकर पूरे उत्तर प्रदेश में 75 हजार बैकयार्ड पोल्ट्री इकाइयां स्थापित करने का लक्ष्य है.












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