नई दिल्ली. बिहार के सीवान जिले में मछली उत्पादन बढ़ाने के लिए प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के तहत सीवान चौर क्लस्टर विकास परियोजना को जमीन पर उतारने की तैयारी शुरू हो गयी है. इसके लिए बसंतपुर, भगवानपुरहाट और गोरेयाकोठी प्रखंड का चयन किया गया है. तीनों प्रखंडों में अलग-अलग क्लस्टर बनाया जाएगा और बाद में तीनों को मिलाकर एक एक समिति गठित की जाएगी. समिति के माध्यम से मत्स्य किसानों को सरकारी सहायता, तकनीकी सुविधा और सस्ती पूंजी उपलब्ध कराने की योजना है. इससे जिले में मछली उत्पादन को दोगुना किया जा सकेगा.
परियोजना के तहत उत्कृष्ट मछली उत्पादन करने वाले 35 किसानों का चयन किया जा चुका है, जिनके माध्यम से समिति का गठन होगा. बिहार सरकार की कैबिनेट से स्वीकृति मिलने के बाद समिति गठन की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी. इसके बाद दूसरे मत्स्य किसानों को भी समिति से जोड़ने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी, ताकि अधिक से अधिक किसानों को योजना का लाभ मिल सके. जिले में बनने वाली समिति में 12 कार्यकारिणी सदस्य होंगे.
195 करोड़ के लोन की मंजूरी दी
▶️ इसमें 50 प्रतिशत महिलाएं और 50 प्रतिशत पुरुष होंगे. एससी, एसटी, एबीसी और ओबीसी वर्ग से दो-दो सदस्य और सामान्य वर्ग से छह सदस्य शामिल होंगे.
▶️ विभाग का उद्देश्य किसानों को समूह में जोड़कर मछली उत्पादन कराना है. अधिकारियों का मानना है कि सामूहिक रूप से उत्पादन करने पर लागत कम होगी.
▶️ इससे किसानों का मुनाफा बढ़ेगा. भारत सरकार ने नाबार्ड के माध्यम से 195 करोड़ रुपये का लोन उपलब्ध कराने की स्वीकृति दी है.
▶️ विभाग अब बिहार सरकार की कैबिनेट से मंजूरी मिलने का इंतजार कर रहा है. इसके बाद राशि उपलब्ध कराने और किसानों को योजना से जोड़ने की प्रक्रिया शुरू होगी.
▶️ यह राशि मत्स्य पालन करने वाले किसानों को बिना ब्याज के उपलब्ध कराने की योजना है.
▶️ विभाग का लक्ष्य इन किसानों को बेहतर सुविधा देकर उत्पादन और आमदनी दोनों बढ़ाना है. परियोजना में हैचरी निर्माण पर भी जोर दिया जाएगा, ताकि स्थानीय स्तर पर मछली का बीज तैयार हो सके.
▶️ फिलहाल दूसरे स्थानों से बीज मंगाने में किसानों को अतिरिक्त खर्च उठाना पड़ता है. स्थानीय स्तर पर बीज मिलने से यह लागत घटेगी.
▶️ इसके अलावा बायोपलॉक तालाब और टैंक बनाने की योजना है. मछलियों के लिए जरूरी दाना भी स्थानीय स्तर पर अधिक से अधिक तैयार कराने पर ध्यान दिया जाएगा.
▶️ विभाग का मानना है कि बीज और दाना स्थानीय स्तर पर उपलब्ध होने से किसानों की लागत घटेगी और आमदनी बढ़ेगी.
▶️ जिला मत्स्य पदाधिकारी चंदन कुमार ने बताया कि परियोजना का मुख्य उद्देश्य मत्स्य किसानों को समूह के रूप में जोड़कर उत्पादन बढ़ाना और उनकी लागत कम करना है.
▶️ स्थानीय स्तर पर मत्स्य बीज और दाना उपलब्ध होने से किसानों को बाहर से सामग्री मंगाने पर होने वाला खर्च बचेगा.
▶️ उन्होंने बताया कि उत्पादन बढ़ने से जिले के लोगों को ताजी मछली उपलब्ध होगी और दूसरे राज्यों से आने वाली मछलियों पर निर्भरता भी कम होगी.
निष्कर्ष
बता दें कि मछली पालन मत्स्य विभाग के सर्वे के अनुसार वर्तमान में भगवानपुर हाट में 25 किसान करीब 60 हेक्टेयर, गौरेयाकोठी में 120 किसान करीब 150 हेक्टेयर और बसंतपुर में 52 किसान करीब 65 हेक्टेयर में बने तालाबों में मछली का उत्पादन कर रहे हैं. यानी तीनों प्रखंडों में 197 किसान करीब 275 हेक्टेयर में मत्स्य पालन कर रहे हैं. जिसको और ज्यादा बढ़ाने की योजना है.











