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ओरण बचाने के लिए सुमेर सिंह को मिलेगा रेंजलैंड अवार्ड्स 2023

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सुमेर सिंह सांवत

नई दिल्ली. जैसलमेर के इन सीमावर्ती विशाल चारागाहों में सदियों से ऐसे सैकड़ों कुएं है, जिनके जल से आमजन का जीवन तो चलता ही है, पशुधन भी पलता है. पशुपालन के लिए ही स्थानीय लोगों ने अपने चारागाहों (ओरण- गोचर) में यह कुएं बनाएं, जिससे उन्हें व उनके पशुधन को पानी मिल सके. इस क्षेत्र लाखों पशुओं के लिए सैकड़ों की संख्या पर कुएं हैं. इन सभी कुंओं पर हजारों की संख्या में पशु पानी पीते हैं. मगर, सरकार ने इन चारागाह, गोचर और ओरण की जमीन को विंड कंपनियों को आंवटित करना चाहती है. अगर, ऐसा हुआ तो मानव जाति के अलावा पशुओं के लिए भी बड़ा संकट पैदा हो जाएगा. जैसलमेर और थार के सीमावर्ती के लोग सुमेर सिंह के नेतृत्व में इस ओरण के लिए इतनी बड़ी लड़ाई क्यों लड़ रहे हैं. इसमें काफी हद तक कामयाबी भी मिलती दिख रही है. इसी का नतीजा है कि आज यानी 27 मार्च 2024 को सुमेर सिंह को उनके जन कल्याणकारी आंदोलन के लिए रेंजलैंड अवार्ड्स 2023 से नवाजा रहा है.

आंदोलन करके उठाई लोगों की आवाज
सुमेर सिंह ने एक योद्धा की तरह लड़कर ओरण (पवित्र नाली) और गोचर (चरागाह) भूमि की रक्षा की और घास के मैदानों और ओरणों की रक्षा के लिए कई आंदोलन शुरू किए. उन्होंने हस्तक्षेप किया ताकि विभिन्न प्रकार की घासें लगाकर घास के मैदान और बंजर भूमि को हरे-भरे चरागाहों में परिवर्तित किया जा सके. अब ये बंजर भूमि हरे-भरे चरागाहों में बदल गई हैं.

600 हेक्टेयर भूमि को ओरण भूमि में पंजीकृत कराया
डेगाराय मंदिर का ओरान 10 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में फैला हुआ है, जिसमें से कुछ शुरू में सरकार के स्वामित्व में था और बाद में कंपनियों को आवंटित किया गया था. इस प्रवृत्ति का मुकाबला करने के लिए, सुमेर सिंह ने स्थानीय समुदाय के साथ मिलकर शेष भूमि को पुनः प्राप्त करने की रणनीति तैयार की। सम्मिलित प्रयासों से लगभग 600 हेक्टेयर भूमि को ओरण भूमि के रूप में सफलतापूर्वक पंजीकृत किया गया.

एनजीटी ने भी हमारे ओरण के पक्ष में फैसला दिया
सुमेर सिंह ने बताया कि हमने सार्वजनिक विरोध प्रदर्शन किया, मीडिया से जुड़े और ओरण और चरागाह भूमि के संरक्षण के लिए स्थानीय लोगों और सरकार से वकालत की. एइसी का नतीजा रहा कि नजीटी (नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल) ने आदेश दिया कि ग्रेट इंडियन बस्टर्ड और अन्य वन्यजीवों जैसी कमजोर प्रजातियों के आवासों की रक्षा के लिए डेगराई ओरान के भीतर कोई उच्च-शक्ति लाइनें स्थापित नहीं की जानी चाहिए. वर्तमान में हमारे प्रयासों का ही नतीजा है कि इन 10,000 हेक्टेयर भूमि का उपयोग कई चरागाहों के लिए किया जा रहा है, साथ ही वन्यजीव और जैव विविधता संरक्षण प्रयासों को सुविधाजनक बनाने के लिए हर 5 किमी पर तालाबों की स्थापना द्वारा ओरण को समर्थन दिया जा रहा है.

सुमेर सिंह के बारे में संक्षिप्त जानकारी
45 साल के सुमेर सिंह भाटी गांव सावंता, जिला जैसलमेर, राजस्थान के रहने वाले हैं. वह पशुपालक हैं, उनके पास 200 जैसलमेरी ऊंट, 15 थारपारकर गाय, 100 जैसलमेरी भेड़ व 30 अन्य जानवर हैं. सुमेर सिंह के पास पैतृक संपत्ति के रूप में 16 हेक्टेयर जमीन है, जिस पर सालाना बाजरा, ज्वार, मूंग, तिल, मोठ जैसी फसलें उगाई जाती हैं.सुमेर सिंह का परिवार पिछली पांच पीढ़ियों से पशुधन पालन में लगा हुआ था, सुमेर सिंह से पहले की पीढ़ियां मुख्य रूप से पशुधन पर निर्भर थीं.

Written by
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