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fish farming: सतह छोड़ गहरे पानी में क्यों उतर रहीं मछलियां, वजन और साइज भी घटा, जानिए वजह

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प्रतीकात्मक तस्वीर

नई दिल्ली. ये एक बड़ी मुश्किल है कि क्लाइमेट चेंज को लेकर अभी उतनी गंभीरता नहीं दिखाई जा रही है जितना दिखाने की जरूरत है. जबकि खतरे की घंटी बज रही है. यही वजह है कि किसी एक-दो जगह नहीं बल्कि हर एक फील्ड में इसका असर दिख रहा है. जबकि समुंद्र भी इससे अछुता नहीं रह पाया है. यही वजह है कि समुंद्र में पलने वाली मछलियों पर भी क्लाइमेट चेंज का असर दिखने लगा है. जिसके चलते समुंद्र की सतह पर पलने वाली मछलियों ने अब सतह को छोड़कर दूसरा रास्ता चुन लिया है.

गौरतलब है कि महाबलिपुरम, तमिलनाडू में जब एक इंटरनेशनल कॉन्क्लेव का आयोजन किया गया था. जिसका मरीन फिशरीज और क्लाइमेट चेंज विषय रखा गया था. यहां बतौर अतिथि बोलते हुए डिप्टी डायरेक्टर जनरल जेके जैना (फिशरीज साइंस), इंडियन काउंसिल ऑफ एग्रीकल्चर रिसर्च ने मरीन फिशरीज पर क्लाडइमेट चेंज के प्रभाव पर कई अहम जानकारियों साझा की थीं. उन्होंने यहां कहा था कि क्लाइमेट चेंज का समुंद्र पर बड़ा असर दिख रहा है.

इस दौरान मरीन फिशरीज और क्लाइमेट चेंज विषय पर आयोजित इंटरनेशनल कॉन्क्लेव पर भी चर्चा की गई थी. इसके पीछे की वजह समुंद्री सतह के तापमान में बढ़ोतरी बताई जा रही है. वहीं महासागर में केमिकल मिल रहे हैं. समुंद्र का स्तर भी तेजी से बढ़ रहा है. इतना ही नहीं चक्रवात जैसी घटनाओं में भी इजाफा हुआ है. इसके अलावा समुंद्र की गर्म लहरों की संख्या भी बढ़ रही है. अल नीनो (दक्षिणी दोलन) भी बढ़ रहा है.

क्यों गहरने पानी में उतर रही हैं मछलियां

इस संबंध में डीडीजी जेके जैना कहते हैं कि कलाइमेट चेंज का असर इतना ज्यादा हो गया है कि म​छलियों ने अपनी सतह छोड़ना शुरू कर दिया है. यही वजह है कि समुंद्र की सतह पर रहने वाली मछलियां ने सतह को छोड़ दिया है. बहुत सी छोड़ रही हैं. जबकि एक खास प्रजाति की मछली सतह पर रहती थी. लेकिन अब ये 50 मीटर गहरे पानी में जा बसी हैं. ​जो बहुत ही बड़ा और खतरनाक संकेत है. जबकि मछलियों के साइज और वजन पर भी इसका असर पड़ रहा है. डीडीजी जेके जैना ने आगे बताया कि क्लााइमेट चेंज के चलते समुंद्री सतह का तापमान बढ़ता चला जा रहा है.

जैना कहते हैं कि इस कारण मछलियों की फेनोलॉजी पर भाी प्रभाव पड़ता दिख रहा है. इसी बड़ी वजह के चलते कुछ मछलियों का वजन और साइज भी घट गया है. उदाहरण के तौर पर समझें तो बॉम्बे डक प्रजाति 232 एमएम से घटकर 192 एमएम जैसे छोटे आकार में मैच्योर हो रही है और अगर वजन की बात करें तो पहले सिल्वर पॉम्फ्रेट 410 ग्राम के आकार में मैच्योंर होता था, लेकिन अब ये महज 280 ग्राम पर मैच्योर हो रहा है. इतना ही नहीं समुंद्री झींगा की लंबाई कम हो रही है.

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