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Dairy Farming : पशुओं में कैल्शियम की कमी दूर करने की ट्रिक, पशुपालकों को होगा जबरदस्त फायदा

चारे की फसल उगाने का एक खास समय होता है, जोकि अलग-अलग चारे के लिए अलग-अलग है.
प्रतीकात्मक फोटो

नई दिल्ली. पौष्टिक आहार न मिलना, दूषित पानी पीने के कारण पशुओं में लगातार कैल्शियम की कमी देखने को मिल रही है. जब कैल्शियम की कमी पशुओं में हो जाती है तो उन्हें बहुत सी परेशानी का सामना करना पड़ता है. न पशु ठीक से चल फिर सकते हैं और जब बैठ जाएं तो खड़े होने में भी तकलीफ का सामना करना पड़ता है. ऐसे में पशुपालकों को बहुत बड़ा नुकसान उठाना पड़ता है. कभी-कभी तो हालात ऐसी हो जाती है कि जानवर मर भी जाते हैं, जिससे किसान-पशुपालकों को आर्थिक नुकसान तक उठाना पड़ता है.

देश की करीब 60-65 फीसदी आबादी गांव में रहती है. ग्रामीण परिवेश में पशुपालन आम सी बात है, लेकिन अब ये पशुपालन बड़े व्यवसाय के रूप में उभरकर सामने आया है. अब लोग एक-दो नहीं दर्जनों पशुओं का पालन करके डेयरी फार्मिंग कर रहे हैं. मगर, कभी-कभी पशुपालकों के सामने चारे की भीषण समस्या पैदा हो जाती है. इस बार भी ऐसे देखने को मिल रहा है कि देश के कई क्षेत्रों में सूखे की स्थिति होने की वजह से खरीफ और रबी दोनों सीजन में हरे चारे की समस्या गंभीर हो गई है. इसके अलावा चारे के न मिलने से दूषित पानी के पीने से और खराब गुणवत्ता वाले चारे के कारण बहुत से पशुओं के शरीर में कैल्शियम का स्तर कम होने लगा है, जो एक बड़ी गंभीर समस्या है. इससे पशु लगातार बीमार हो रहे हैं. पशु चिकित्सकों की मानें तो इस कैल्शियम की कमी को दूर करने के लिए पौष्टिक चारे की व्यवस्था जरूर करें.

चारे का प्रबंधन पहले से करेंः पौष्टिक आहार न मिलना, दूषित पानी क पीने के कारण पशुओं में लगातार कैल्शियम की कमी देखने को मिल रही है. जब कैल्शियम की कमी पशुओं में हो जाती है तो उन्हें बहुत सी परेशानी का सामना करना पड़ता है. डॉक्टर मनोज शर्मा की मानें तो सूखे या अकाल की स्थति में पशुओं को पौष्टिक और हरा चारा नहीं मिल पाता. ऐसी स्थिति में पशुओं की रोग प्रतिरोधक क्षमता कम हो जाती है. इतना ही नहीं पशुओं की मौत भी हो जाती है. इसलिए पशुओं के लिए चारे का इंतजाम तो पशुपालकों को करना ही चाहिए. उन्होंने बताया कि इस बार महाराष्ट्र में चारे का संकट पैदा हो गया है.

कैसे बनाए रखें कैल्शियम का संतुलनः पशुपालक चेतन स्वरूप कहते हैं कि पशुपालन में सबसे पहली शर्त ही ये है कि पशुओं के लिए चारे का उचित प्रबंधन करना. चाहे सूखा हो या अकाल पड़े, पशुओं को तो चारा चाहिए. अगर चारा नहीं मिलेगा तो इसका असर पशुओं के स्वास्थ्य पर पड़ेगा और जब पशुओं का स्वास्थ्य ठीक नहीं रहेगा तो दूध उत्पादन नहीं होगा, ऐसे में पशुपालकों को सिर्फ आर्थिक नुकसान ही उठाना पड़गा. इसलिए डेयरी पशुओं में कैल्शियम का स्तर बनाए रखना बेहद जरूरी है. अगर सूखे की स्थिति दिख रही है तो किसान या पशुपालकों को पहले से ही सूखे चारे का प्रबंधन या स्टोर करना चाहिए.

पशुओं में ये होने चाहिए तत्वः पशुओं की आवश्यकता को पूरा करने के लिए फास्फोरस, कैल्शियम के साथ अन्य पोषक तत्व और खनिज युक्त भोजन मिलना चाहिए, जो पशुओं को स्वस्थ रख सकें. पानी कैल्शियम और समग्र स्वास्थ्य में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है. इसलिए मनुष्यों की तरह से ही पशुओं को साफ और ताजा पानी पीने के लिए देना चाहिए. डॉक्टरों की सहायता से रक्त परीक्षण के माध्यम से समय-समय पर पशु के रक्त में कैल्शियम के स्तर की निगरानी करें.

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