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Dairy: डेयरी पशुओं में होती हैं कई समस्याएं, गर्मी के मौमस में साइलेज खराब है या अच्छा, जानिए कैसे करें पता

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प्रतीकात्मक फोटो.

नई दिल्ली. पशुपालन करने वाले पशुपालक साइलेज बनाकर पशुओं को खिलाते हैं. हरे चारे को साइलेज बनाने से इसे पौष्टिक अवस्था में काफी समय तक सुरक्षित रखा जा सकता है. इतना ही नहीं पशुओं को पूरे वर्ष इसे खिलाया जा सकता है. कई गर्मियों में हरे चारे की कमी होने के कारण भी पशुओं को साइलेज खिलाया जाता है. साइलेज खिलाने से दाने की भी बचत होती है. चारे की फसलों के पोषक तत्वों को साइलेज बनाकर नष्ट होने से बचाया जा सकता है. इस वजह से पशुपालक पशुओं को साइलेज खिलाते हैं.

हालांकि एक्सपर्ट कहते हैं कि खराब साइलेज के कारण डेयरी पशुओं में कई तरह की समस्याएं हो जाती हें. एक्सपर्ट तो यहां तक कहते हैं कि डेयरी किसानों को जानवरों को साइलेज खिलाने से पहले उसका परीक्षण लैब में करवा लेना चाहिए. वहीं खराब साइलेज की समस्या छोटे और मध्यम किसानों के साथ अधिक होती है. क्योंकि ये किसान छोटे पैमाने पर इसका उत्पादन करते हैं या फिर इसे खरीदकर लंबे समय तक खुले में रखते हैं. इससे दिक्कतें आती हैं.

कभी न खिलाएं खराब साइलेजः बता दें कि पिछले दिनों गुरु अंगद देव पशु चिकित्सा एवं पशु विज्ञान विश्वविद्यालय, लुधियाना ने साइलेज के उपयोग के बारे में गलत धारणाओं को स्पष्ट करने और डेयरी किसानों को खराब गुणवत्ता वाले साइलेज के प्रतिकूल प्रभावों के बारे में शिक्षित करने के लिए एक पैनल चर्चा का आयोजन किया गया था. विस्तार शिक्षा निदेशक डॉ. प्रकाश सिंह बराड़ ने कहा था कि चारे की नियमित आपूर्ति दूध उत्पादन का आधार है और डेयरी उद्योग पूरे वर्ष हरे चारे की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए साइलेज पर निर्भर करता है लेकिन घटिया साइलेज का उपयोग डेयरी पशुओं के स्वास्थ्य और उत्पादन को गंभीर रूप से प्रभावित कर सकता है.

साइलेज बनाने के तरीकों के बारे में बताया थाः उन्होंने कहा था कि हाल के दिनों में राज्य के कुछ हिस्सों में साइलेज की खराब गुणवत्ता की सूचना मिली है, जिससे डेयरी पशुओं में स्वास्थ्य संबंधी चिंताएं पैदा हो गई हैं. उन्होंने कहा कि अच्छी गुणवत्ता वाले साइलेज के उत्पादन के बारे में संबंधित विभागों के क्षेत्रीय पदाधिकारियों और डेयरी किसानों को शिक्षित करने के लिए पैनल चर्चा की व्यवस्था की गई थी. वहीं इस आयोजन में पशुधन फार्म के निदेशक डॉ. आरएस ग्रेवाल ने बंकरों के डिजाइन, चारे को भूनना, उचित तरीके से दबाना, ढंकना और खुरचना सहित साइलेज बनाने के तरीकों के महत्व को समझाया था.

ऐस साइलेज को कभी न खिलाएंः पूरे वर्ष अच्छी गुणवत्ता वाले चारे की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए साइलेज के रूप में हरे चारे का संरक्षण एक उत्कृष्ट तकनीक है. उन्होंने साइलेज के गुणवत्ता मापदंडों को भी साझा किया और सलाह दी कि यदि साइलेज में एक सीमा से अधिक फंगस या एफ्लाटॉक्सिन पाया जाता है तो साइलेज को पूरी तरह से त्याग देना चाहिए. डॉ. ग्रेवाल ने साइलेज निर्माण के दौरान इसकी गुणवत्ता में सुधार के लिए एडिटिव्स के उपयोग के फायदों पर भी चर्चा की. उन्होंने कहा कि इसका उपयोग भैंस, गाय, बकरी और भेड़ आदि सहित सभी जुगाली करने वालों के लिए किया जा सकता है.

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