नई दिल्ली. पशुपालन में कई बार आपको ऐसी चीजों का सामना करना पड़ता है, जिसे आप पसंद नहीं करते हैं. मसलन कई बार पशु को किसी वजह से चोट लग जाती है. या फिर वो विकलांग हो जाते हैं. ऐसे में आप उन्हें बाड़े से बाहर तो फेंक नहीं सकते हैं, जिस वजह से उनके लिए कुछ अलग से इंतजाम करने की जरूरत पड़ती है. इसी को लेकर राष्ट्रीय डेयरी अनुसंधान संस्थान करनाल और आईवीआरआई इज्जतनगर की एनिमल एक्सपर्ट की टीम ने बताया कि है कि इस स्थिति में पशुओं की देखरेख कैसे की जाए.
एक्सपर्ट के मुताबिक प्रत्येक गौशाला में विकलांग पशुओं को रखने की अलग से व्यवस्था होनी चाहिए. गौशाला में इस प्रकार के अशक्त पशुओं को रखने के लिए अलग से बाड़े निर्मित किए जाने चाहिए. यह बाड़ा इस प्रकार निर्मित होना चाहिए कि इसमें जंगली/आवारा पशुओं तथा पक्षियों की पहुंच न हो सके. पूरी देखभाल और उपचार के साथ सभी अशक्त पशुओं को इन वार्डों में अलग रखना चाहिए और स्वस्थ पशुओं से भिड़ंत के कारण होने वाली चोटों से इन्हें बचाया जाना चाहिए.
बाड़े के फर्श को ऐसा बनाएं
इस प्रकार के अशक्त और विकलांग पशुओं के लिए बनाया गया बाड़ा फिसलन रहित और मुलायम बिछावनयुक्त होना चाहिए. 20 सेंमी बालू या भूसे की मोटी परत सहित एक कच्चा फर्श उपयुक्त होगा. क्योंकि लगातार एक-दो घंटों तक कठोर सतह पर लेटने से इनकी त्वचा और बाहरी तंत्रिकाओं को नुकसान पहुंच सकता है. फर्श पर स्थानीय तौर पर उपलब्ध अच्छी प्रकार से सुखाई गई बिछावन सामग्री होनी चाहिए या इन पशुओं के आरामदायक विश्राम के लिए रबर की चटाई या मैट्रेस की व्यवस्था की जानी चाहिए.
जख्मी पशुओं का इस तरह रखें ख्याल
इन पशुओं के बाड़े में शेड के अंदर आरामदायक सूक्ष्म जलवायु तथा पशुओं के विश्राम के लिए आरामदायक फर्श का विशेष प्रावधान किया जाना चाहिए. इसके लिए पशुशाला में सीलिंग पंखे, एग्जॉस्ट पंखे, हीटिंग और कूलिंग उपकरणों की व्यवस्था की जानी चाहिए. अशक्त पशुओं के बाड़े को मक्खियों से मुक्त होना चाहिए विशेषकर उन पशुओं के मामले में जो घायल हैं या जिन्हें जख्म हो गया है. बाड़े में अच्छा वायु प्रवाह होना चाहिए तथा इनमें स्वच्छ पीने के पानी और गर्मी तथा सर्दी के मौसम से बचाव के प्रावधान किए जाने चाहिए.
हरी घास देना होता है बेहतर
लाचार पशुओं के मामले में, पशुओं की स्थिति में सावधिक तौर पर तीन बार या दिन में तीन बार बदलाव की सुविधा का सृजन किया जाना चाहिए. लाचार पशुओं के लिए शेड के भीतर ही उनकी जरूरत के अनुसार आहार तथा पानी की विशेष व्यवस्था की जानी चाहिए. उन्हें संतुलित, पोषक तथा आसानी से पचने वाला आहार दिया जाना चाहिए. ठोस आहार की अपेक्षा स्वादिष्ट हरी घास को देना बेहतर होता है. पशु के लिए पर्याप्त मात्रा में स्वच्छ पानी वहीं उपलब्ध कराया जाना चाहिए. जल पात्र और खाने की ट्रे चौड़े आधार वाली तथा सतही होनी चाहिए.












