Home मछली पालन Fish Farming: मछली पालन में कैसे रखें पानी की सेहत का ख्याल, ग्रोथ के लिए इन बातों का ध्यान देना जरूरी
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Fish Farming: मछली पालन में कैसे रखें पानी की सेहत का ख्याल, ग्रोथ के लिए इन बातों का ध्यान देना जरूरी

तालाब में खाद का अच्छे उपयोग के लिए लगभग एक सप्ताह के पहले 250 से 300 ग्राम प्रति हेक्टेयर बिना बुझा चूना डालने की सलाह एक्सपर्ट देते हैं.
तालाब में मछली निकालते मछली पालक

नई दिल्ली. मछली पालन में तालाब के पानी की सेहत का भी ख्याल रखना पड़ता है. एक्सपर्ट का कहना है कि तालाब के पानी में कार्बन कार्बन डाईऑक्साइड की मात्रा बढ़ जाती है. इसको नियंत्रित करना पड़ता है. जबकि अमोनिया की भी मात्रा पानी में बढ़ जाती है तो इसे भी नियंत्रित करने की जरूरत होती है. पानी में कार्बन डाइऑक्साइड तीन रूपों में पाया जाता है. मुक्त कार्बन डाईऑक्साइड, बाइकार्बर्बोनेट आयन और कार्बोनेट आयन. अम्लीय पानी में मुक्त कार्बन डाइऑक्साइड से टॉक्सीन पैदा कर देता है. जब तालाब में घुलित ऑक्सीजन की मात्रा कम होती है, तो कार्बन डाईऑक्साइड को नियंत्रित किया जाना चाहिए.

कार्बन डाईऑक्साइड की उपस्थिति मछली द्वारा ऑक्सीजन ग्रहण करने में मुश्किल पैदा करती है. कार्बन डाइऑक्साइड सांद्रता concentration आमतौर काफी अधिक तब होती है, जब घुलित ऑक्सीजन सांद्रता कम होती है. मछली द्वारा कार्बन डाइऑक्साइड की उच्च सांद्रता को सहन किया जा सकता है और अधिकांश प्रजातियां 60 मिलीग्राम प्रति लीटर कार्बन डाइऑक्साइड युक्त पानी में जीवित रह सकती है, बशर्ते ऐसे पानी में अगर घुलित ऑक्सीजन सांद्रता अधिक हो.

कार्बन डाइऑक्साइड को ऐसे करें कम
एक्सपर्ट का कहना है कि कार्बन डाइऑक्साइड सांद्रता आमतौर पर रात के दौरान बढ़ती है और दिन के दौरान घटती है. कार्बन डाइऑक्साइड की विशेष रूप से उच्च सांद्रता तालाबों में फाइटो प्लांकटन मरने के बाद, तापमान स्तरीकरण के ख़त्म के बाद और बादलों के मौसम के दौरान होती है. कार्बन डाईऑक्साइड को नियंत्रित करने के लिए तालाब में जरूरी आक्सीजन देना होता है. वहीं स्टॉकिंग, फीडिंग और उर्वरक का सही मात्रा में प्रयोग करके कार्बन डाइऑक्साइड को कम किया जाता है.

पानी में अमोनिया
अमोनिया मछली के चयापचय और बैक्टीरिया द्वारा कार्बनिक पदार्थों के अपघटन के उत्पाद के रूप में तालाब के पानी में आ जाता है. पानी में, अमोनिया नाइट्रोजन दो रूपों में होता है. आयोनाइज्ड और अनआयोनाइज्ड. मछली के लिए अनआयोनाइज्ड अमोनिया विषैला होता है, लेकिन आयोनाइज्ड अमोनिया केवल अत्यधिक सांद्रता पर हानिकारक होता है. मछलियों में अनआयोनाइज्ड की कम टॉक्सीन 0.6 से 2.0 मिलीग्राम प्रति लीटर के स्तर पर खतरनाक प्रभाव 0.1 से 0.3 मिलीग्राम प्रति लीटर की सांद्रता पर क्लीयर होती है. पानी का पीएच और तापमान कुल अमोनिया के अनुपात को नियंत्रित करता है. एक यूनिट की पीएच ग्रोथ मोटे तौर पर अनआयोनाइज्ड अमोनिया के अनुपात में दस गुना ग्रोथ करती है. कुल अमोनिया नाइट्रोजन की सबसे अधिक सांद्रता आमतौर पर फाइटोप्लांकटन के विघटन के बाद होती है और उस समय कार्बन डाइऑक्साइड की उच्च सांद्रता के कारण पानी का पीएच कम होता है.

अमोनिया को नियंत्रित करने के उपाय
तालाब में ऑक्सीजन को बढ़ाकर पीएच को कम करके अमोनिया के विषाक्तता को कम किया जा सकता है. तालाब में स्वस्थ फाइटोप्लांकटन बनाए रखने से, नियमित रूप से पानी बदलने से नाइट्रिफिकेशन प्रक्रिया के माध्यम से अमोनिया को नाइट्रेट में परिवर्तित करने के लिए जैविक
फिल्टर का उपयोग करने से भी आमेनिया को नियंत्रित किया जा सकता है.

Written by
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