Home मछली पालन Fisheries: बरसात में मछलियों को लाल धब्बे वाली बीमारी का है खतरा, ऐसे करें पहचान और इलाज
मछली पालन

Fisheries: बरसात में मछलियों को लाल धब्बे वाली बीमारी का है खतरा, ऐसे करें पहचान और इलाज

तालाब में खाद का अच्छे उपयोग के लिए लगभग एक सप्ताह के पहले 250 से 300 ग्राम प्रति हेक्टेयर बिना बुझा चूना डालने की सलाह एक्सपर्ट देते हैं.
तालाब में मछली निकालते मछली पालक

नई दिल्ली. तालाब में पल रही कुछ मछलियों को यदि कोई बीमारी हो जाए तो फिर जल्द ही वो हैल्दी मछलियों को भी बीमारी कर देती हैं. असल में फिश एक्सपर्ट कहते हैं कि मछलियों को बीमारियों से बचाना जरूरी होता है. इस समय में बारिश का मौसम है और इस मौसम में मछलियों को लाल रंग धब्बे वाली बीमारी होने का खतरा ज्यादा रहता है. ऐसे में बरसात में मछलियों की नियमित जांच करते रहना चाहिए, अगर मछलियों को ये बीमारी हो तो तुरंत ही इलाज किया जा सके. एक्सपर्ट कहते हैं कि देर होने पर नुकसान बड़ा हो सकता है.

आपको बताते चलें कि इस बीमारी के कारण मछली के शरीर, पंखों या गलफड़ों पर छोटे लाल बिंदु, खूनी धारियां या गहरे घाव हो जाते हैं. यह मुख्य रूप से खराब पानी की गुणवत्ता के कारण होता है. ऐसे में बारिश दिनों में तालाब के पानी पर खास ध्यान रखना चाहिए.

मछलियां पानी की ऊपरी सतह पर आ जाती हैं
अगर बरसात में संक्रमित मछलियों के शरीर पर लाल रंग के धब्बे जैसा घाव हो जाए तो समझ जाएं कि लाल धब्बे वाली बीमारी हो गई हे.

ये धीरे-धीरे शरीर पर फैल जाता है. संक्रमित मछलियां पानी की ऊपरी सतह पर उछलने लगती हैं.

ज्यादा संक्रमित मछलियों में गहरे जख्म होने के कारण चमड़े का उपरी भाग टूट कर गिरने लगता है.

सामान्य रूप से मछलियों में पायी जानेवाली इस बीमारी को लाल घाव के नाम से जाना जाता है.

इस बीमारी से बचाव के लिए चूने का छिड़काव 200-600 किलो ग्राम प्रति हेक्टेयर पानी की गहराई की दर से करने से बीमारी को रोका जा सकता है.

इसके अलावा पोटैशियम परमैग्नेट 2 मिली ग्राम प्रति ली की दर से नमक का घोल 400 किलो ग्राम प्रति हेक्टेयर मीटर पानी की गहराई की दर से डालें.

संयुक्त रूप से एक-एक दिन के गैप पर 6 दिनों तक ये काम करने से इस रोग पर 90 प्रतिशत नियंत्रण पाया जा सकता है.

वहीं मछलियां अगर हैल्दी हैं तो उनका शरीर चमकता हुआ होता है. प्राकृतिक रंग नजर आता है.

मछली का पंख और पूंछ मांसपेशियों के साथ कसा हुआ होता है. शरीर पर कोई घाव या फोड़ा का नहीं होना चाहिए.

कभी तालाब की सतह पर शरीर को घसीटते ना दिखाई देना चाहिए. मछली का कभी तालाब के किनारे पर ना आना.

निष्कर्ष
एक्सपर्ट कहना है कि बरसात के दिनों में मछलियों की इस बीमारी से बचाव करना चाहिए और ​नियमित रूप से मछलियों की जांच से इसका पता लगाना आसान हो जाता है.

Written by
Livestock Animal News Team

Livestock Animal News is India’s premier livestock awareness portal dedicated to reliable and timely information.Every news article is thoroughly verified and curated by highly experienced authors and industry experts.

Related Articles

मछली में कुछ बीमारियां ऐसी हैं जो पूरे मछली के बिजनेस को नुकसान पहुंचा सकती हैं.
मछली पालनसरकारी स्की‍म

Fisheries Sector: बिहार में साल 2030 तक फिशरीज सेक्टर के विकास का रोडमैप तैयार

नई दिल्ली. बिहार सरकार राज्य में फिशरीज सेक्टर को मजबूत करने के...

मछली में कुछ बीमारियां ऐसी हैं जो पूरे मछली के बिजनेस को नुकसान पहुंचा सकती हैं.
मछली पालन

Fish Farming: एनएफडीपी की मदद से मछली पालकों को मिल रही है कई बेहतरीन सहूलियत

नई दिल्ली. मत्स्यपालन, पशुपालन और डेयरी मंत्री राजीव रंजन सिंह उर्फ ​​ललन...

fish farming
मछली पालन

Fish Farming: अगस्त में मछली के कुल वजन का 3 से 5 फीसद डालें तालाब में पूरक आहार

नई दिल्ली. अगस्त के महीने में मौसम उमस भरा रहता है और...

Fisheries, Fish Rate, Government of India, Live Stock Animal News, Boat
मछली पालन

Fish Farmers: फिशरीज सेक्टर के लिए इसरो ने जहाजों की निगरानी और नियंत्रण को तैयार किया ऐप

नई दिल्ली. प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (पीएमएमएसवाई) के तहत मत्स्य पालन बंदरगाहों...