Home पोल्ट्री Poultry: फ्री रेंज और शेड में मुर्गी पालन के अपने फायदे और चुनौतियां हैं
पोल्ट्री

Poultry: फ्री रेंज और शेड में मुर्गी पालन के अपने फायदे और चुनौतियां हैं

Poultry animals including chicken, duck, turkey and quail on a farm
Different poultry animals raised for eggs and meat production.

नई दिल्ली. मुर्गी पालन मुख्यता दो तरह से किया जाता है. एक तो मुर्गियों को पिंजरे में बंद करके ही फीड और पानी वगैरह दिया जाता है और उत्पादन लेकर मुनाफा कमाया जाता है. जबकि दूसरा तरीका फ्री रेंज (ओपन) मुर्गी पालन का है. इसमें सुबह मुर्गियों को बाहर खुले में छोड़ दिया जाता है. इसके बाद मुर्गियां चाहे जहां जाएं वे दिनभर घूमती हैं, घास और कीड़े-मकोड़े खाती हैं. शाम को वे खुद साधारण शेड में वापस आ जाती हैं. जिससे वो प्रोटीन से भरपूर अंडों और मीट का उत्पादन करती हैं. इससे भी मुर्गी पालन में फायदा होता है.

एक्सपर्ट कहते हैं कि इस तरीके में ​दाने के खर्च में बचत होती है. लगभग 40 फीसद से 50 परसेंट तक दाना बाहर से ही मिल जाता है, जिससे फीड का खर्च काफी कम होता है. वहीं ​कम निर्माण लागत भी आती है. महंगा शेड बनाने की आवश्यकता नहीं होती. साधारण शेड से काम चल जाता है.

फ्री रेंज और शेड में फार्मिंग करें या न करें, जानें यहां
एक्सपर्ट के मुताबिक प्राकृतिक भोजन और मूवमेंट के कारण मांस और अंडों का स्वाद बेहतर होता है, जिससे बाजार में दाम अधिक मिलते हैं.

हालांकि इसमें चुनौतियां भी हैं. ​कुत्ते, बिल्ली, बाज या नेवले जैसे शिकारियों के हमले का खतरा रहता है.

वहीं ​दिनभर भागदौड़ करने के कारण वजन बढ़ने की गति धीमी होती है.

​वहीं दूसरे तरीके में चूजे आने से लेकर बिक्री तक मुर्गियों को शेड के अंदर ही बंद रखकर दाना-पानी दिया जाता है.

इससे ​बेहतर बायोसिक्योरिटी (जैव-सुरक्षा) होती है. बाहर के जीव-जंतुओं या अन्य पक्षियों के संपर्क में न आने से बीमारियों का खतरा कम रहता है.

​शिकारियों से पूरी सुरक्षा होती है. शेड सुरक्षित होने के कारण जंगली जानवरों का डर नहीं रहता है.

वातावरण ​नियंत्रित किया जा सकता है. शेड का तापमान, वेंटिलेशन और लाइट किसान के नियंत्रण में होती है.

​तेजी से वजन बढ़ता है. एक ही जगह रहकर दिन-रात दाना खाने से मुर्गियों का वजन बहुत तेजी से बढ़ता है.

हालांकि बड़ा शेड, पंखे और उपकरण लगाने में शुरुआती खर्च अधिक होता है.

​100 फीसद तक बाजार का कमर्शियल दाना खिलाना पड़ता है, जिससे फीड का खर्च बढ़ जाता है.

निष्कर्ष
यदि ​फ्री-रेंज चुनेंगे तो आपका बजट सीमित होगा. आपके पास खाली, खुली जमीन उपलब्ध होगी. आप कम लागत में देसी तरीके से अधिक मुनाफे वाले अंडे या मांस बेचना चाहते हैं तो यही तरीका सही है. वहीं शेड में मुर्गी पालन से आपके पास निवेश के लिए अच्छा बजट की जरूरत होती है. आप बड़े पैमाने पर कमर्शियल फार्मिंग करना चाहते हैं और मुर्गियों को तेजी से तैयार करके जल्दी बेचना चाहते हैं तो ये तरीका सही है.

Written by
Livestock Animal News Team

Livestock Animal News is India’s premier livestock awareness portal dedicated to reliable and timely information.Every news article is thoroughly verified and curated by highly experienced authors and industry experts.

Related Articles

पोल्ट्री

Poultry Farming Tips: मुर्गी पालन नहीं करना चाहते हैं तो पालें बत्तख, इसमें है तगड़ा मुनाफा

नई दिल्ली. पोल्ट्री फार्मिंग में मुर्गी पालन के अलावा बत्तख पालन भी...

पोल्ट्री

Poultry News: बैकयार्ड पोल्ट्री फार्मिंग में साइंटिफिक तरीकों को अपनाने से मिलता है बेहतर उत्पादन

नई दिल्ली. पोल्ट्री फार्मिंग में बैकयार्ड पोल्ट्री फार्मिंग (Poultry Farming) कम बजट...

Vaccination reduces the use of antibiotics, hence reduce the AMR.
पोल्ट्री

Poultry: मुर्गियों को ट्रांसपोर्ट के लिए लोड करने से सबसे ज्यादा तनाव का सामना करना पड़ता है

नई दिल्ली. मुर्गियों को पकड़ने, लोड करने और ट्रांसपोर्ट के दौरान होने...

poultry farming
पोल्ट्री

Poultry: 4 मुर्गियों से शुरू करनें पोल्ट्री फार्मिंग, आगे चलकर खूब होगा मुनाफा

नई दिल्ली. क्या आप जानते हैं कि सिर्फ 4 देसी मुर्गियों से...