Home डेयरी Milk Production: पशु मेले में 87.7 लीटर दूध देकर एचएफ गाय ने तोड़ा रिकॉर्ड, जानें क्या खाती है गाय
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Milk Production: पशु मेले में 87.7 लीटर दूध देकर एचएफ गाय ने तोड़ा रिकॉर्ड, जानें क्या खाती है गाय

पहला ईनाम जीतने वाली एचएफ गाय.

नई दिल्ली. हरियाणा के करनाल में एक होल्स्टीन फ्रिजियन (एचएफ) क्रॉस-ब्रीड गाय ने राष्ट्रीय डेयरी अनुसंधान संस्थान (एनडीआरआई) में आयोजित राष्ट्रीय डेयरी मेला में एक दिन में 87.7 किलोग्राम दूध उत्पादन का रिकॉर्ड तोड़ दिया. ये गाय करनाल के झांझरी गांव के सुनील मेहला की है. जिन्होंने दूध उत्पादन (एचएफ) श्रेणी में पहले स्थान पर आने के लिए 21 हजार रुपए का पुरस्कार जीता. इससे वो बेहद ही खुश नजर आए और कहा कि उन्हें गाय की वजह से सम्मान मिला है. वो अपनी गाय का बहुत अच्छे ढंग से ख्याल रखते हैं. ताकि उसे किसी तरह की दिक्कत न आए.

वहीं मेहला की एक दूसरी गाय ने उसी श्रेणी में 74 किलोग्राम दूध के साथ दूसरा स्थान प्राप्त किया और तीन दिवसीय मेले के दौरान 3 लाख 11 हजार रुपए का नकद पुरस्कार जीता है.

किसान के पास हैं 150 गायें
मेहला ने बातचीत के दौरान बताया कि पहला ईनाम जीतने वाली गाय का नाम सोनी है. सोने का ये कुल 6वां पुरस्कार है, इसने 2023 में कुरुक्षेत्र में 81.3 किलोग्राम दूध के अपने पिछले रिकॉर्ड को तोड़ा था. उन्होंने बताया कि उनके पास 2016 में बने अपने शेड में कुल 150 गायें हैं. जहां सभी गायों को उच्च पोषण आहार दिया जाता है. ताकि उनका दूध उत्पादन उच्च हो. सख्त गर्मी और सर्दी की परिस्थितियों को देखते हुए अन्य किसानों के लिए सुझावों के बारे में पूछे जाने पर, उन्होंने कहा कि हरियाणा के किसान बहुत उन्नत हैं और दूध निकालने के संबंध में उपलब्ध हर सलाह और तकनीक का उपयोग करते हैं. इसके अलावा, शनिवार को करनाल में एक डेयरी मेले में विजेता गाय, सोनी, के मालिक और आयोजकों के साथ 100 से अधिक किसानों को सम्मानित किया गया.

40 हजार लोग मेले में आए
एनडीबीआई के निदेशक और उपाध्यक्ष ने हरियाणा, पंजाब, राजस्थान, उत्तर-पूर्वी राज्यों, उत्तर प्रदेश के 40 हजार से से अधिक किसानों, पशुपालकों और पशु प्रेमियों के इस मेले में भाग लेने की बात कही है. उन्होंने कहा कि कि इस प्रकार के मेले का मुख्य उद्देश्य किसानों और पशुपालकों को डेयरी विज्ञान की विकसित तकनीकों और विधियों के बारे में एक ही स्थान पर जागरूक करना है. उन्होंने किसानों से कहा कि उन्हें “अमूल” की तर्ज पर सहकारी समितियाँ बनानी चाहिए. उन्होंने आगे कहा कि 150 से अधिक स्टॉल राष्ट्रीय कृषि मेले में निजी क्षेत्र के 17 कृषि स्टॉल में स्थापित किए गए हैं. आईसीएआर-एनडीए सलाहकार समिति के अध्यक्ष नागेंद्र शर्मा ने भी इस पर टिप्पणी की.

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