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Animal Husbandry: इस राज्य में सरकार ने बनाई ऐसी योजना, जो किसानों की देगी डबल मुनाफा

गर्मियों के मौसम में अधिक तापमान, लू, पीने के पानी तथा हरे चारे की कमी के कारण दुधारू पशुओं में दूध का उत्पादन कम हो जाता है.

नई दिल्ली. दूध की मांग देश के सभी राज्यों में बढ़ रही है. डेयरी से जुड़कर किसान अपनी इनकम को भी बढ़ा रहे हैं. अब सरकार भी किसानों के लिए कई स्कीम चला रही है. एक ऐसी ही योजना अब मध्य प्रदेश सरकार ने शुरू की है, जो दुग्ध क्रांति लाएगी. दूध का उत्पादन बढ़ाने के लिए मध्य प्रदेश सरकार ने डॉक्टर भीमराव अंबेडकर कामदेव योजना बनाई है. इसके अंतर्गत किसान 25 गाय या भैंस की 1 यूनिट, अधिकतम 8 यूनिट (200 पशु) तक खरीद सकेंगे. पशुपालन एवं डेयरी विभाग राज्यमंत्री स्वतंत्र प्रभार लखन पटेल ने इसकी जानकारी दी. जो बेसहारा गोवंश हाईवे से लेकर शहरों और गांवों की गलियों में घूमते हैं. यहां तक कि किसानों की फसलें खाकर उन्हें बर्बाद कर देते हैं. काफी बार सड़कों पर इन गोवंशों से बड़े हादसे हो जाते हैं, जिनमें जनहानि भी हो जाती है. अब मध्य प्रदेश में ऐसे गोवंश के लिए सरकार ने कदम उठाए हैं.

आइये जानते हैं कि क्या है स्वावलंबी गौशाला स्थापना नीति. इसके माध्यम से निराश्रित गोवंशों को ठिकाना दिया जाएगा और उसे लिए सरकार लोगों को जमीन भी उपलब्ध कराएगी. इस योजना में सरकार की तरफ से काफी सहूलियतें भी दी जाएंगी.

मध्य प्रदेश में अब दूध का उत्पादन बढ़ाया जाएगा: इसके लिए सरकार ने डॉ. भीमराव अंबेडकर कामधेनु योजना बनाई है। इस योजना में किसान 25 गाय या भैंस की 1 यूनिट, अधिकतम 8 यूनिट (200 पशु) तक खरीद सकेंगे. करीब 42 लाख रुपये इसमें खर्च आएगा. सरकार इन किसानों से सीधा दूध लेगी. इस योजना में अधिकतक दो सौ गाय या दो सौ भैंस तक खरीदे जा सकेंगे. पशुपालन एवं डेयरी विभाग राज्यमंत्री स्वतंत्र प्रभार लखन पटेल ने बताया कि निराश्रित गोवंशों को अब आसरा मिलेगा.

स्वावलंबी गौशाला स्थापना नीति 2025 को मंजूरी: मध्य प्रदेश में निराश्रित घूम रहे गोवंशों को अब ठिकाना मिलेगा, उनकी अच्छे से देखरेख हो सकेगी. सरकार लगातार निराश्रित गोवंशों की देखरेख पर काम कर रही थी. अब सरकार ने स्वावलंबी गौशाला स्थापना नीति 2025 को मंजूरी दी है. इसके बाद मध्य प्रदेश में करीब 8 लाख से अधिक निराश्रित गोवंशों की देखरेख अच्छे से हो सकेगी. यह निराश्रित गोवंश सड़कों पर हादसों का कारण बनते थे. लोगों को इसे काफी नुकसान हो रहा था.

पीपीपी मॉडल से गौशाला: लोगों को होने वाले नुकसान को कम करने में के लिए सरकार के प्रयास अब काम आएंगे. पीपीपी मॉडल से गौशाला की तर्ज पर गोवंश विहार खोले जाएंगे. इस नीति में 1रुपये की दर से निजी निवेशकों को जमीन दी जाएगी. जमीनें पंचायत में मिलेंगी. सरकार इसका अनुदान देगी. इन गोशालााओं के लिए सरकार द्वारा बिजली कम दर पर उपलब्ध कराई जाएगी. वहीं यहां रखे जाने वाली गाय को प्रतिदिन गाय के हिसाब से 40 रुपये भी दिए जाएंगे.

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