नई दिल्ली. बिहार में मेडिकल की पढ़ाई के लिए होने वाली काउंसिलिंग प्रक्रिया फिलहाल रोक लगा दी गई है. इसकी वजह से इस वर्ष भी सेशन लेट होने की संभावना बन गई है. मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक पिछले साल भी नीट (नेशनल एलिजिबिलिटी कम एंट्रेंस टेस्ट) यूजी पेपर लीक होने के कारण नामांकन प्रक्रिया में काफी देरी हुई थी. इस साल की खास बात यह थी कि प्राइवेट मेडिकल कॉलेजों की 50 प्रतिशत सीटों पर भी सरकारी मेडिकल कॉलेजों की तरह ही फीस ली जानी थी लेकिन इस फैसले का कुछ प्राइवेट मेडिकल कॉलेजों ने विरोध किया और पटना हाईकोर्ट में याचिका दायर कर दी.
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि राज्य के 9 प्राइवेट मेडिकल कॉलेजों की कुल 1350 सीटें हैं। इनमें से कुल 675 सीटें सरकारी फीस दर पर दी जानी थीं. अब खुद की पसंद कॉलेज चुनने की प्रक्रिया फिर से शुरू करनी होगी, क्योंकि कई छात्रों ने अपने विकल्प में प्राइवेट कॉलेजों को भी चुना था.
3 निजी डेंटल कॉलेजों में 200 सीटें होंगी
वहीं ऑल इंडिया कोटे की 15 फीसद सीटों पर एडमिशन के लिए पहले 11 अगस्त को सीट आवंटन होना था, लेकिन उम्मीदवारों की मांग और अदालत में लंबित मामलों के कारण समय सीमा को पहले ही 9 अगस्त तक बढ़ा दिया गया.
पहले राउंड की च्वाइस फिलिंग और लॉकिंग की आखिरी तारीख 7 अगस्त थी, लेकिन कई उम्मीदवारों को तकनीकी दिक्कतें आने के कारण एमसीसी ने समय सीमा 6 अगस्त तक बढ़ा दी थी.
एमसीसी ने यह बदलाव उस समय किया, जब अचानक च्वाइस फिलिंग प्रक्रिया रोक दी गई और संशोधित काउंसिलिंग शेड्यूल जारी किया गया.
इसके पहले उम्मीदवारों को 4 अगस्त तक विकल्प भरने और लॉक करने के लिए कहा गया था और सीट आवंटन परिणाम 6 अगस्त को जारी होना था.
अब यह संशोधन खासतौर पर बेंचमार्क विकलांग उम्मीदवारों के लिए किया गया, जो अब तक नामित केंद्रों से प्रमाण पत्र प्राप्त नहीं कर पाए हैं.
85 फीसद सीटों पर अंडरग्रेजुएट मेडिकल एडमिशन काउंसिलिंग 2025 के तहत एडमिशन होगा.
इसमें सरकारी मेडिकल, डेंटल, आयुष, वेटनरी के साथ प्राइवेट मेडिकल, डेंटल और आयुष कॉलेज शामिल होंगे.
12 सरकारी मेडिकल और 2 डेंटल कॉलेजों में कुल 1347 सीटों पर एडमिशन होगा। इनमें एमबीबीएस की 1232 और डेंटल की 115 सीटें हैं.
नौ प्राइवेट मेडिकल कॉलेजों में 1350 सीटें हैं, वहीं 3 निजी डेंटल कॉलेजों में 200 सीटें (जिनमें 9 सीटें एनआरआई कोटा की) होंगी.
इसके अलावा वेटनरी के 2 कॉलेजों में 136 सीटें और 8 सेल्फ-फाइनेंस सीटों पर एडमिशन होगा.
सरकारी मेडिकल कॉलेजों में एमबीबीएस और बीडीएस की कुल 1347 सीटों में से 434 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी.












