नई दिल्ली. जलीय कृषि बीमा यानि एक्वाकल्चर इंश्योरेंस एक तरह की वित्तीय सुरक्षा कवच का काम करता है, जो मछली पालन, झींगा पालन और अन्य जालीय जीवन के पालन में होने वाले तमाम खतरों को कवर करने का काम करता है. जिससे कभी भी मत्स्य पलकों को नुकसान की वजह से आर्थिक संकट होता है तो उसमें उन्हें मदद मिलती है. बता दें कि ये प्राकृतिक आपदाओं, बाढ़, तूफान, बीमारियों और चोरी के कारण फसल के नुकसान की भरपाई भी करता है. जिससे किसानों को वित्तीय स्थिरता मिलती है. जिसका फायदा मछली किसानों को होता है.
एक्सपर्ट कहते हैं कि जालीय कृषि गतिविधियों को बीमा सुरक्षा मिलती है. प्राकृतिक आपदा रोग आदि से होने वाले नुकसान में भी मदद से मिलती है. जोखिम कम कर इनकम को स्थिर बनाने में भी यह मददगार है. मत्स्य किसानों के लिए सुरक्षा कवच के तौर पर काम करता है. इसके लिए एनएफडीपी पर पंजीकरण करें और जलीय कृषि बीमा का फायदा उठाएं.
योजना के फायदे क्या हैं
अगर आप इस योजना का फायदा लेते हैं तो बाढ़, सूखा, ज्यादा बारिश और बीमारियों से होने वाले नुकसान की भरपाई हो जाएगी.
फसल खराब होने पर इनपुट लागत की भरपाई 80 फीसद तक मिलती है. जिससे मछली किसान कर्ज के जाल में फंसने से बच जाता है.
प्रधानमंत्री मत्स्य किसान समृद्धि सह योजना के तहत बीमा प्रीमियम पर 40 परसेंट तक प्रोत्साहन राशि मिलती है. यह अधिकतम 1 लाख रुपए तक है.
महिला और आरक्षित वर्गों को ज्यादा फायदा मिलता है. अनुसूचित जाति एससी, अनुसूचित जनजाति एसटी और महिला किसानों को 10 परसेंट अतिरिक्त प्रोत्साहन यानी कुल 50 फीसद तक फायदा मिलता है.
इसमें मछली पकड़ने से लेकर केज कल्चर, बायोफ्लाक और आरएएस जैसी उन्नत तकनीक को भी शामिल किया गया है.
इस बीमा का फायदा लेने के लिए एनएफडीपी पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन करना होता है. न्यू इंडिया इंश्योरेंस कंपनियों के माध्यम से बीमा ले सकते हैं.
निष्कर्ष
गौरतलब है कि मछली पालन एक अच्छा काम है और इसमें अच्छी कमाई भी होती है लेकिन नुकसान का भी खतरा बना रहता है. खासतौर पर उन मछली किसानों के लिए जो अभी इस काम में नए हैं. लेकिन सरकार की इस तरह की स्कीम का फायदा उठाकर मछली किसान खुद को सेफ कर सकते हैं और फिर इस काम को शुरू कर सकते हैं. जबकि बीमा न कराने पर नुकसान हुआ तो कर्ज में भी फंसने का खतरा रहता है. इसलिए जरूर से बीमा करवा लें.












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