नई दिल्ली. मध्य प्रदेश के रायसेन जिले में बेसहारा गोवंश की बढ़ती संख्या को देखते सरकार ने बड़ी स्तर की गोशाला का निर्माण करने का फैसला किया है. मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक तकरीबन 320 एकड़ क्षेत्र में इसे बनाया जाएगा. जिसपर 15 करोड़ रुपए की राशि खर्च होगी. जिसकी स्वीकृत कर दी गई है और निर्माण के लिए टेंडर भी जारी कर दिया गया है. पशुपालन विभाग की ओर से बताया गया है कि कार्य एक वर्ष में पूरा किया जाएगा ताकि सड़कों पर भटक रहे गोवंश को सुरक्षित गोशाला में पहुंचाया जा सके और इससे होने वाली परेशानी दूर हो सके.
प्रस्तावित गोशाला में 6,000 गोवंश के लिए रहने, चारे और देखभाल की पूरी व्यवस्था रहेगी. इसके लिए गोशाला परिसर में आधुनिक रोड, पानी के सोर्स, चारा स्टोरेज केंद्र, पशु अस्पताल, क्वारेंटीन जोन और सुरक्षा परिधि जैस निर्माण को शामिल किया गया है. परियोजना पूरी होने पर ये जिले की पहला गो-शाला होगी और क्षमता के आधार पर सबसे बड़ा गो-आश्रयों भी होगा.
जिले में अभी 64 गोशालाएं चल रहीं
जिले में फिलहाल 64 गोशालाएं संचालित हैं, जिनमें करीब 16 हजार पशुओं को आश्रय मिला हुआ है.
इसके बावजूद नगर और ग्रामीण इलाकों में गोवंश सड़कों पर घूमते हुए आसानी से दिखाई देते हैं, जिससे दुर्घटनाओं और फसलों के नुकसान हो रहा है.
इसी समस्या के समाधान के लिए राज्य सरकार ने किलोट अभयारण्य की योजना तैयार की थी, जिसे अब पूरा किया जा रहा है.
इससे गोवंश संरक्षण और गायों को सुरक्षित आश्रय मिल सकेगा. साथ ही परिसर में गोबर आधारित जैविक खाद तैयार करने की योजना भी शामिल है जिसे स्थानीय किसानों को फायदा होगा.
कहा जा रहा है कि इस काम के लिए टेंडर प्रक्रिया पूरी कर ली गई है और निर्माण कार्य जल्द शुरू होगा.
वहीं चिकलोद परियोजना के समानांतर पठारी में निर्माणाधीन गो-आश्रय को भी अतिरिक्त बजट मिला है.
पशुपालन विभाग ने आरईएस को 25 लाख की स्वीकृत राशि में से साढ़े 12 लाख रुपए जारी किए हैं.
यह राशि सीमा दीवार, पानी की व्यवस्था और भवनों के निर्माण में उपयोग में ली जाएगी.












