नई दिल्ली. जब भी मुर्गी पालन का काम शुरू करें तो एक बात का खास ख्याल रखें कि मुर्गी पालन में आने वाले खर्च का हिसाब और रिकॉर्ड जरूर रखें. एक्सपर्ट के मुताबिक मुर्गी पालन मुनाफे के लिए किया जाता है. यदि हिसाब का रिकार्ड ही नहीं रहेगा तो इसका पता नहीं चलेगा. वहीं हिसाब नहीं रखने से मुर्गी पालन करके सफल भी नहीं हो पाएंगे. एक्सपर्ट का कहना है कि जब मुर्गी पालन के लिए चूजे फॉर्म में डालें तो इसी वक्त से हिसाब-किताब रखना शुरू कर दें.
चूजों को खरीदने में कितना खर्च आया है इसका रिकॉर्ड होना जरूरी है. एक्सपर्ट का कहना है कि चूजों के लिए कितना दाना खरीदा है. इसपर कितना खर्च आया इसका भी रिकॉर्ड रखना बेहद ही जरूरी होता है. वहीं दवा पर भी खर्च करना पड़ता है. इसलिए दवा के खर्च का भी हिसाब किताब लगाना चाहिए. बिजली के खर्च का हिसाब किताब रखना चाहिए.
किन चीजों का हिसाब रखें
मुर्गियों को पालने में कुल खर्च कितना आता है. हर एक चीज का हिसाब रिकॉर्ड में रखना चाहिए.
वहीं जो मुर्गियां तैयार हो जाएं और उन्हें आप सेल करें तो किस रेट में सेल किया है इसका भी हिसाब रखना बेहद जरूरी है.
वहीं इससे मुनाफा कितना हुआ है. इसका भी पता चल जाएगा और इसका भी हिसाब कहीं लिखकर रख लेना चाहिए.
यदि अंडों के उत्पादन के लिए मुर्गी पालन करते हैं तो मुर्गी एक दिन में कितना दाना खा रही है. कितने अंडे दे रही है और अंडे किस रेट पर बिक कर रहे हैं. इससे कितना मुनाफा हो रहा है इसका भी रिकॉर्ड रखना चाहिए.
एक्सपर्ट का कहना है कि रिकॉर्ड रखने का फायदा ये होगा कि आपको आसानी से पता चल जाएगा कि इस काम में फायदा हुआ है या नुकसान.
निष्कर्ष
जबकि लिखकर नहीं रखने से ना तो नुकसान का पता चलेगा नहीं फायदे की जानकारी होगी. मान लीजिए अगर नुकसान हो रहा है तो उसका भी जानकारी नहीं होगी और इससे टाइम खराब हो जाएगा, जबकि फिर काम को करते हैं नुकसान दोबारा हो जाएगा.












