नई दिल्ली. रोड पर और खेतों में खुलेआम घूम रहे गोवंश एक बड़ी समस्या बनते जा रहे हैं. ये दिक्कत कई राज्यों की है. हालांकि सरकारें इस पर रोक लगाने के लिए काम कर रही हैं. इसी कड़ी में मध्य प्रदेश सरकार के निर्देश पर मध्य प्रदेश गौसावर्धन बोर्ड पशुपालन एवं डेयरी विभाग (Cow Development Board, Animal Husbandry and Dairy Department) ने भी राज्य में बेसहारा पशुओं की रोकथाम के लिए काम किए हैं. ताकि बेसहारा पशुओं को सहारा दिया जा सके और उससे फायदा भी उठाया जा सके. जिससे पशुओं से होने वाली समस्या पर कंट्रोल किया जा सके.
मध्य प्रदेश की डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार की ओर से स्वावलंबी गौशाला नीति 2025 के तहत प्रदेश में 19 जिलों में जमीन आवंटन का काम किया गया है. ताकि वहां गौशाला बनाकर पशुओं को गौशाला में रखा जा सके, जिससे तमाम तरह की परेशानी भी दूर हो जाए और पशुओं से फायदा भी उठाया जा सके.
कहां कितनी जमीन दी गई
सरकार ने मंदसौर जिले के कुड़िया शिवगढ़ में 197 एकड़ जमीन आवंटित की है. जबकि जबलपुर की देहरीकला देहरीखुर्द में 461, रायसेन के चिकलोद कला में 320 एकड़ जमीन गौशाला के लिए दी है.
दमोह के सीता नगर में सबसे ज्यादा 511 एकड़ जमीन दी है. वहीं सागर के देवाल में 411, पन्ना के शिकारपुर में 184 एकड़ जमीन गौशाला नीति के तहत आवंटित की गई है.
विदिशा के लाड़पुर में 196, अशोकनगर के इंदौर में 293, छतरपुर के बेनीगंज में 144 और छतरपुर के मौजा गोयरा में 143 एकड़ जमीन दी गई है.
वहीं रतलाम के डाबडी में 156, शाजापुर उमरोद देवास में 130, भिंड के पाडरी एवं रामपुर में 291 और नरसिंहपुर के बेलखेड़ी शेड में 184 एकड़ जमीन दी गई है.
इसी तरीके से मऊगंज के मोरहना में 130, टीकमगढ़ के दांतगोरा उगड़ में 258, देवास की सिकली मोहम्मद खेड़ा में 134, खरगोन के मुराल्ला में 133, राजगढ़ के तलोड़ी में 142 और रीवा के गौधाम में 135 एकड़ जमीन दी गई है.
निष्कर्ष
सरकार की ओर से कहा जा रहा है कि इसे गौ संवर्धन और संरक्षण के संकल्प को पूरा किया जाएगा. जिसका फायदा मिलना तय है. इसी वजह से स्वालंबन गौशाला नीति के तहत 19 जिलों में जमीन दी गई है.












