Home मछली पालन Fish Farming: बायोफ्लॉक पौंड में मछली पालन से हो रही कमाई, डीएम जानी हकीकत
मछली पालन

Fish Farming: बायोफ्लॉक पौंड में मछली पालन से हो रही कमाई, डीएम जानी हकीकत

निरीक्षण के दौरान डीएम व अन्य अधिकारी.

नई दिल्ली. बिहार का शिवहर जिला राज्य के छोटे जिले में आता है लेकिन मछली पालन के काम में यहां बड़े काम हो रहे हैं. प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना वर्ष 2024-25 के तहत जिले में विभिन्न मत्स्य पालन परियोजनाएं संचालित हो रही हैं. ताकि मछली पालन बढ़ सके. वहीं डीएम प्रतिभा रानी ने जिले में हो रहे कार्यों की समीक्षा के लिए निरीक्षण किया. इस दौरान उन्होंने तकनीक आधारित मछली पालन, बीज उत्पादन और नए तालाबों के निर्माण कार्य की प्रगति का जायजा लिया. बताया गया कि तरियानी प्रखंड के सलेमपुर में बायोफ्लॉक तकनीक से उन्नत तरीके से पालन हो रहा है.

डीएम ने तरियानी प्रखंड के सलेमपुर में लाभार्थी किशन कुमार की साइट का निरीक्षण किया. मछली पालक किशन कुमार ने मत्स्य पालन के अपने अनुभव को बताया. कहा कि यदि उन्हें सरकार और जिला प्रशासन की ओर से प्रोत्साहित किया जाए तो वह और व्यापक स्तर पर मछली उत्पादन कर सकते हैं. डीएम ने इसको लेकर उन्हें आश्वस्त किया कि हर संभव मदद दी जाएगी.

25 हजार मछलियां पल रही हैं
वहीं बताया गया कि यहां बायोफ्लॉक पौंड विधि से मत्स्य पालन किया जा रहा है. यहां पौंड लाइनर, ब्लोअर के माध्यम से ऑक्सीजन सप्लाई और एयरेटर का उपयोग कर हाई डेंसिटी (उच्च घनत्व) कल्चर किया जा रहा है.

मौजूदा वक्त में यहां 20 हजार कैटफिश और 5 हजार आईएमसी मछलियों का पालन बायोफ्लॉक विधि से किया जा रहा है.

हैचरी के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने और बीज उत्पादन, 3.5 एकड़ में विस्तृत हैचरी जीर्णोद्धार योजना को भी डीएम द्वारा देखा गया.

निरीक्षण के दौरान बीज उत्पादन की वैज्ञानिक प्रक्रिया की जानकारी ली गई. जिसमें ब्रूडर मछलियों को इंजेक्शन के माध्यम से अंडा उत्पादन कराना शामिल हैं.

अंडों को 72 घंटे तक हैचिंग प्रक्रिया में रखना, हचलिंग को 7 दिन प्री-नर्सरी और 15 दिन नर्सरी में रखने के बाद कल्चर पौंड में स्थानांतरित करना शामिल है.

निरीक्षण के उपरांत डीएम प्रतिभा रानी ने मत्स्य विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिया कि सरकार की इन लाभकारी योजनाओं का लाभ अधिक से अधिक किसानों तक पहुंचाया जाए.

उन्होंने मत्स्य पालकों को आधुनिक तकनीक अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया, ताकि कम लागत और कम जगह में अधिक उत्पादन प्राप्त कर उनकी इनकम बढ़ाई जा सके.

कहा कि आधुनिक तकनीक के उपयोग को प्रोत्साहित करने को सरकार की ओर से योजनाएं चलायी जा रही है.

निष्कर्ष
बताया गया कि बायोफ्लॉक तकनीक मछली पालन का आधुनिक, सघन और टिकाऊ तरीका है, जो बिना बड़े तालाब के, तारपोलिन टैंकों में सूक्ष्मजीवों का उपयोग करके पानी को शुद्ध रखता है और मल को प्रोटीन में बदलकर मछलियों को खिलाता है. यह तरीका कम जगह (छत्त/आंगन) और पानी में अधिक उत्पादन के लिए बहुत उपयोगी है. इसमें 5-6 महीने में 1-1.5 किलो मछली प्राप्त किया जा सकता है. इसमें 4-5 मीटर के टैंक में 1-2 टन उत्पादन संभव है.

Written by
Livestock Animal News Team

Livestock Animal News is India’s premier livestock awareness portal dedicated to reliable and timely information.Every news article is thoroughly verified and curated by highly experienced authors and industry experts.

Related Articles

Further, necessary provisions are made by the State Government in their respective Marine Fishing Regulation Acts Rules (Amendments) for the installation of Turtle Excluder Devices (TED) for the protection of sea turtles.
मछली पालन

Fisheries: 39 हजार करोड़ खर्च करके फिशरीज सेक्टर को सरकार ने बनाया मजबूत

नई दिल्ली. भारत विश्व का दूसरा सबसे बड़ा मछली उत्पादक देश है....

Interim Budget 2024
मछली पालन

Fisheries: मछली पालन में महिला को दें नौकरी, सरकार देगी 15 हजार रुपए

नई दिल्ली. मछली पालन के काम में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने के...

Further, necessary provisions are made by the State Government in their respective Marine Fishing Regulation Acts Rules (Amendments) for the installation of Turtle Excluder Devices (TED) for the protection of sea turtles.
मछली पालन

Fisheries: स्मॉल स्केल फिशरीज से 90 फीसद मछुआरों को मिलता है रोजगार

नई दिल्ली. भारत सरकार के मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी मंत्रालय के...