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Fisheries: स्मॉल स्केल फिशरीज से 90 फीसद मछुआरों को मिलता है रोजगार

Further, necessary provisions are made by the State Government in their respective Marine Fishing Regulation Acts Rules (Amendments) for the installation of Turtle Excluder Devices (TED) for the protection of sea turtles.
प्रतीकात्मक तस्वीर।

नई दिल्ली. भारत सरकार के मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी मंत्रालय के मत्स्य विभाग के सचिव डॉ. अभिलक्ष लिखी, खाद्य और कृषि संगठन (एफएओ) और टीबीटीआई ग्लोबल द्वारा आयोजित 5वें विश्व लघु मत्स्य पालन सम्मेलन में शामिल हुए. वो भारत के एक उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व कर रहे हैं. यह सम्मेलन 27 से 30 अप्रैल 2026 तक थाईलैंड के हुआ हिन में आयोजित किया जा रहा है. बता दें कि इस आयोजन में लगभग 50 देशों के 300 प्रतिनिधी शामिल हुए और इसमें 45 तकनीकी सत्र आयोजित किए जाएंगे. इस दौरान डॉ. लिखी ने कई महत्वपूर्ण बातें भी कहीं.

उन्होंने कहा कि लघु मत्स्य पालन (एसएसएफ) वैश्विक मत्स्य पालन की रीढ़ की हड्डी है. यह दुनिया के लगभग 90 फीसद मछुआरों को रोजगार प्रदान करता है और समुद्री और अंतर्देशीय मछली पकड़ में लगभग 40 परसेंट का योगदान देता है. साथ ही यह खाद्य सुरक्षा, पोषण, गरीबी उन्मूलन और लैंगिक समानता में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है. विशेष रूप से कटाई के बाद की गतिविधियों में महिलाओं की भागीदारी के माध्यम से.

एशिया मजदूरों और उपभोक्ताओं का है सबसे बड़ा हिस्सा
एशिया में जहां एसएसएफ श्रमिकों और उपभोक्ताओं का सबसे बड़ा हिस्सा है, मत्स्य पालन मुख्य रूप से बहु-प्रजाति, बहु-उपकरण और परिवार-आधारित प्रकृति का है. यह लाखों तटीय और अंतर्देशीय आजीविका का समर्थन करता है.

साथ ही, यह क्षेत्र भूमि स्वामित्व की असुरक्षा, डेटा की कमी, तटीय भीड़भाड़, संसाधन क्षरण, औद्योगिक मत्स्य पालन के साथ संघर्ष और जलवायु संबंधी जोखिमों जैसी चुनौतियों का सामना करता है.

उन्होंने कहा कि उत्पादन से परे इसके महत्व को पहचानते हुए, लघु-स्तरीय मत्स्य पालन को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता दी गई है.

इसमें एफएओ के सतत लघु-स्तरीय मत्स्य पालन को सुरक्षित करने के लिए स्वैच्छिक दिशानिर्देश (वीजीएसएसएफ) और क्षेत्रीय स्तर पर एफएओ-एपीएफआईसी और बीओबीपी-आईजीओ जैसे सहयोग मंचों के माध्यम से सतत प्रबंधन, कार्यकाल अधिकारों और सामाजिक संरक्षण पर बल दिया गया है.

भारत में लघु मत्स्य पालन (एसएसएफ) समुद्री मत्स्य पालन गतिविधियों में प्रमुख भूमिका निभाता है. इसमें लगभग 40 लाख मछुआरे मुख्य रूप से 12 समुद्री मील तक के प्रादेशिक जलक्षेत्र में काम करते हैं.

यह क्षेत्र मुख्य रूप से राज्य समुद्री मत्स्य पालन विनियमन अधिनियमों (एमएफआरए) द्वारा शासित है और तटीय मत्स्य पालन के दबाव, जलवायु जोखिम और बाजार की अस्थिरता जैसी चुनौतियों का सामना करता है.

भारत में हाल ही में नीतिगत फोकस मत्स्य सहकारी समितियों और मछली किसान उत्पादक संगठनों (एफएफपीओ) के माध्यम से संस्थानों को मजबूत करने पर केंद्रित रहा है.

इसे प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (पीएमएमएसवाई) और ईईजेड नियम 2025 के अंतर्गत हस्तक्षेपों द्वारा समर्थित किया गया है, ताकि स्थिरता और मछुआरों की आजीविका को बढ़ाया जा सके.

Written by
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