Home मछली पालन Scheme: यूपी में तालाब बनवाने का आधा खर्च खुद देगी सरकार, मछली पालन कर आप हो सकते हैं मालामाल
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Scheme: यूपी में तालाब बनवाने का आधा खर्च खुद देगी सरकार, मछली पालन कर आप हो सकते हैं मालामाल

तालाब में मछली पालन करके कमाई की जा सकती है.

नई दिल्ली. उत्तर प्रदेश सरकार लगातार किसानों की इनकम बढ़ाने और कृषि को फायदेमंदद बनाने के लिए कई योजनाएं चला रही है. सरकार का प्रयास है कि किसान सिर्फ अन्नदाता ही नहीं, बल्कि समृद्ध और आत्मनिर्भर उद्यमी भी बनें. साथ ही योगी सरकार किसान को खेती तक सीमित नहीं, बल्कि उनको आधुनिक तकनीक, जल संरक्षण, सिंचाई सुविधाओं और अतिरिक्त आय के स्रोतों से भी जोड़ रही है. इसी क्रम में ‘खेत तालाब योजना’ किसानों के लिए बेहद फायदेमंद साबित हो रही है. यह योजना जल संरक्षण और कृषि उत्पादन बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है.

राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के तहत संचालित ‘खेत तालाब योजना’ का मुख्य उद्देश्य वर्षा जल का संचयन कर किसानों को सिंचाई के लिए स्थायी सुविधा उपलब्ध कराना है. आज के समय में भूगर्भ जल स्तर लगातार नीचे जा रहा है, ऐसे में खेत तालाब योजना किसानों के लिए वरदान साबित हो रही है. खेतों में बनाए जाने वाले तालाब वर्षा के पानी को संरक्षित करते हैं, जिससे सूखे के समय भी किसानों को सिंचाई के लिए पानी उपलब्ध रहता है.

आधी लागत खुद लगाएगी सरकार
इस योजना के तहत 22 मीटर × 20 मीटर × 3 मीटर आकार का तालाब बनाया जाता है. इसकी कुल लागत 1 लाख 5 हजार निर्धारित की गई है.

जिसमें सरकार द्वारा 52,500 का अनुदान दिया जाता है. यानी किसान को आधी लागत सरकार वहन कर रही है.

इससे छोटे और सीमांत किसानों को भी इस योजना का लाभ आसानी से मिल पा रहा है.

यह योजना केवल सिंचाई तक सीमित नहीं है, बल्कि किसानों को अतिरिक्त आय के नए अवसर भी प्रदान कर रही है.

खेत तालाब में किसान मत्स्य पालन, मोती उत्पादन, सिंघाड़ा उत्पादन और अन्य जलीय खेती कर सकते हैं. इससे किसानों की आय के कई स्रोत विकसित हो रहे हैं.

प्रदेश सरकार आधुनिक सिंचाई व्यवस्था को भी बढ़ावा दे रही है। योजना के अंतर्गत स्प्रिंकलर सेट पर 80 से 90 प्रतिशत तक अनुदान दिया जा रहा है.

वहीं पम्पसेट पर 15,000 अथवा 50 प्रतिशत तक की सहायता उपलब्ध कराई जा रही है. इससे किसानों की सिंचाई लागत कम हो रही है और जल का बेहतर उपयोग सुनिश्चित हो रहा है.

सरकार ने इस योजना में पूरी पारदर्शिता सुनिश्चित की है. किसानों का चयन ऑनलाइन पोर्टल पर बुकिंग के आधार पर ‘प्रथम आवक प्रथम पावक’ यानी पहले आओ-पहले पाओ के सिद्धांत पर किया जाएगा.

इससे किसी प्रकार की सिफारिश या भ्रष्टाचार की संभावना समाप्त हो रही है और पात्र किसानों को सीधे लाभ मिल रहा है.

इससे किसानों को सरकारी दफ्तरों के चक्कर नहीं लगाने पड़ते और डिजिटल व्यवस्था के माध्यम से उन्हें सुविधा मिल रही है.

कानपुर नगर के भूमि संरक्षण अधिकारी, आर.पी. कुशवाहा ने बताया कि प्रदेश सरकार कृषि को आत्मनिर्भर और तकनीक आधारित बनाने पर विशेष ध्यान दे रही है.

जल संरक्षण के माध्यम से खेती को सुरक्षित बनाना, किसानों को आधुनिक सिंचाई प्रणाली से जोड़ना और खेती के साथ मत्स्य पालन जैसी गतिविधियों को बढ़ावा देना सरकार की दूरदर्शी नीति को दर्शाता है.

आज प्रदेश के हजारों किसान इस योजना का लाभ लेकर अपनी आय बढ़ा रहे हैं. खेत तालाब बनने से फसलों की उत्पादकता बढ़ रही है और किसानों को मौसम पर निर्भरता कम करनी पड़ रही है.

अनुदान दो चरणों में मिलेगा

  1. पहली किस्तः तालाब की खुदाई का काम पूरा होने पर.
  2. दूसरी किस्तः पानी आने का रास्ता (इनलेट) और डिस्प्ले बोर्ड लगने के बाद.
  3. जरूरी दस्तावेज: आवेदन के लिए किसान की ‘फार्मर रजिस्ट्री होना अनिवार्य है.
  4. टोकन मनीः ऑनलाइन आवेदन के साथ 1000 रुपये की टोकन राशि जमा करनी होगी, जो वापस मिलेगी.
  5. वेबसाइटः इच्छुक किसान कृषि विभाग के पोर्टल Agri darshan पर जाकर ऑनलाइन बुकिंग कर सकते हैं.
  6. समय सीमाः बुकिंग के 15 दिन के भीतर सत्यापन होगा और 30 दिन के भीतर तालाब तैयार करना होगा.
Written by
Livestock Animal News Team

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