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Cow: गायों के जरिए ऑर्गेनिक खाद तैयार होगी, पारंपरिक जैविक खाद से 15 गुना अधिक प्रभावशाली होगी

मध्य प्रदेश के एक गौशाला में चारा खाती गायें.

नई दिल्ली. गो संरक्षण को ग्रामीण अर्थव्यवस्था, वैज्ञानिक खेती और रोजगार से जोड़ने की दिशा में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश एक और बड़ा प्रयोग करने जा रही है. पहली बार देश में खेती किसानी में गोबर, गोमूत्र और माइक्रोबियल रिसर्च आधारित जेनेटिक इंजीनियरिंग तकनीक का प्रयोग किया जाएगा. आईआईटी कानपुर के शोधार्थियों की खोज ने खेती में गो आधारित जीन क्रांति की नई जमीन तैयार कर दी है. इस तकनीक के जरिए तैयार होने वाली ऑर्गेनिक खाद पारंपरिक जैविक खाद की तुलना में 15 गुना अधिक प्रभावशाली होगी.

इतना ही नहीं, इसकी न्यूट्रिशन क्षमता लगभग 5 गुना अधिक होगी, जबकि इसे तैयार करने में लगने वाला समय भी 10 गुना तक कम हो जाएगा. योगी सरकार इसे खेती, गो संरक्षण और ग्रामीण रोजगार के नए मॉडल के रूप में देख रही है.यह तकनीक आईआईटी कानपुर के पीएचडी शोधार्थी अक्षय श्रीवास्तव ने विकसित की है.

यह तकनीक खेती की लागत घटाने के साथ मिट्टी की उर्वरता भी बढ़ाएगी
उन्होंने जेनेटिक इंजीनियरिंग, एंजाइम एक्सट्रैक्शन, माइक्रोबियल आइसोलेशन और बायोपॉलिमर डेवलपमेंट को गोबर एवं गो मूत्र आधारित प्राकृतिक संसाधनों के साथ जोड़कर हाई क्वालिटी ऑर्गेनिक और नेचुरल फर्टिलाइजर तैयार किया है.

शोधकर्ताओं ने फसल-विशिष्ट माइक्रोबियल कॉन्सन्ट्रेट तैयार किया है, जिसके जरिए केवल 1 किलोग्राम माइक्रोबियल कॉन्सन्ट्रेट से करीब 2000 किलोग्राम जैविक उर्वरक विकसित किया जा सकता है.

शुरुआत में 50 किलोग्राम वाले ऑर्गेनिक फर्टिलाइजर बैग तैयार करने की योजना है. खेतों में इसकी जरूरत लगभग 350 से 400 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर तक बताई गई है.

जो पारंपरिक जैविक खाद की तुलना में बेहद कम है. इससे किसानों की परिवहन, श्रम और उपयोग लागत में बड़ी कमी आएगी. तकनीक से तैयार इस उर्वरक की लागत भी कम आएगी.

सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि इस उत्पाद को इंडियन काउन्सिल ऑफ एग्रीकल्चरल रिसर्च द्वारा 40 से अधिक गुणवत्ता एवं पोषण मानकों पर परीक्षण और प्रमाणित भी किया जा चुका है.

यह उर्वरक मुख्य रूप से गोबर, गोमूत्र, कृषि अपशिष्ट और प्राकृतिक जैविक स्रोतों से तैयार किया जा रहा है.

माइक्रोबियल प्रोसेसिंग और एंजाइम एक्सट्रैक्शन तकनीक की मदद से इसमें पोषक तत्वों की क्षमता कई गुना बढ़ाई गई है.

अब गोबर आधारित बायोगैस उत्पादन के लिए भी विशेष माइक्रोबियल तकनीकों पर काम किया जा रहा है.

बायोगैस निर्माण के बाद बचने वाली स्लरी और वेस्ट बायोमास से केवल 3 से 4 दिनों के भीतर हाई क्वालिटी कस्टमाइज्ड ऑर्गेनिक फर्टिलाइजर तैयार किए जा रहे हैं.

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