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Dairy: मध्य प्रदेश में हर दिन 11.50 लाख किलो दूध का हो रहा है उत्पादन

The revised NPDD will give an impetus to the dairy sector by creating infrastructure for milk procurement
प्रतीकात्मक तस्वीर।

नई दिल्ली. मध्य प्रदेश की सरकार लगातार राज्य में दूध उत्पादन बढ़ाने के लिए काम कर रही है. सरकार की मंशा है कि राज्य में दूध उत्पादन बढ़ जाए और से 9 फीसद से इसे बढ़ाकर 20 फीसद कर दिया जाए. ताकि राज्य देश में नंबर वन दूध उत्पादक राज्य बन जाए और इसे मिल्क कैपिटल कहा जाए. इसी क्रम में मप्र स्टेट कोऑपरेटिव डेयरी फेडरेशन लिमिटेड (एमपीसीडीएफ) को टेकओवर करने के एक साल में नेशनल डेयरी डेवलपमेंट बोर्ड (एनडीडीबी) ने प्रदेश में दुग्ध उत्पादन बढ़ाकर रोजाना 11.50 लाख किग्रा कर दिया है.

जबकि सालना टर्नओवर 250 करोड़ रुपए तक बढ़ गया है. किसानों का पिछले 3 साल का बकाया करोड़ों रुपए का भुगतान भी कर दिया गया. यह उपलब्धि लिकेज सुधारने, दूध उत्पादन संग्रहण बढ़ाने और पारदर्शिता के चलते मिली है.

1398 करोड़ का भुगतान हुआ है
एनडीडीबी ने एमपीसीडीएफ को पिछले वर्ष मई माह में टेकओवर किया था. तब किसानों को 1,398 करोड़ का भुगतान हुआ था.

तब दूध का संग्रहण 9.65 लाख किग्रा था. अब 21 सौ करोड़ रुपए से अधिक का संग्रहण हुआ है और दूध का उत्पादन बढ़कर 11.50 लाख किग्रा हो गया है.

मशीन से हो रहा है वजन
मशीन में दूध के वजन और उसकी गुणवता मापक यंत्र एक साथ होंगे. यह यंत्र मोबाइल ऐप में अपने आप दूध में कितना फैट और वजन है, यह एंट्री कर देगा, जो मिल्क यूनिट और फेडरेशन के सेंटर पर ऑनलाइन तत्काल दर्ज हो जाएगी.

इसी ऐप के जरिए उसके रेट भी मोबाइल ऐप पर आ जाएंगे. इसे किसान और कलेक्शन सेंटर के सचिव एक साथ स्क्रीन पर देख सकेंगे.

प्रति गोवंश दूध की उत्पादकता बढ़ाने पर काम
मप्र में प्रति गोवंश दूध की उत्पादकता बढ़ाने पर काम किया जा रहा है. वर्तमान में यहां 4.5 किग्रा प्रतिदिन प्रति गोवंश दूध की उत्पादकता है.

इसे बढ़ाकर 6.5 किग्रा तक ले जाना है. नस्ल सुधार, हाईब्रिड गोवंश किसानों को उपलब्ध कराने के लिए योजना बनाई जाएगी.

50 लाख किग्रा होगी प्रोसेसिंग प्लांटों की क्षमता
प्रदेश में दूध प्रोसेसिंग की क्षमता 18 लाख किग्रा की है. इनमें दस लाख किग्रा दूध प्रति दिन प्रोसेसिंग हो रहा है.

अब इनकी क्षमता 50 लाख किग्रा तक बढ़ाई जाएगी. प्रदेश में दूध प्रोसेसिंग संयंत्र भोपाल, इंदौर, ग्वालियर, जबलपुर, उज्जैन और सागर में है.

एमपीसीडीएफ भोपाल के प्रबंध संचालक डॉ. संजय गोवाणी का कहना है कि कारोबार बढ़ाने के साथ साथ लाखों किसानों को जोड़ने और उनको भरोसा दिलाने का काम किया जा रहा है.

उन्होंने आगे बताया कि पुराने भुगतान के साथ दूध की गुणवत्ता और ग्राहकों का विश्वास जीतने पर काम होगा.

Written by
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