नई दिल्ली. बिहार की सरकार के निर्देश पर संचालित मोबाइल वेटरनरी यूनिट की इमरजेंसी सेवा की वजह से पशुपालकों को काफी फायदा हो रहा है. क्योंकि उनके पशुओं का इलाज घर पर ही मिल रहा है. असल में अरवल से खबर आ रही है कि यहां प्रखंड क्षेत्र के विभिन्न गांवों में पहुंचकर पशुपालकों के मवेशियों का लगातार इलाज कर रही है. गांव में ही पशु चिकित्सा सुविधा उपलब्ध होने से पशुपालकों को बीमार मवेशियों को लेकर दूर स्थित पशु अस्पतालों का चक्कर लगाने से राहत मिल रही है. मोबाइल वेटरनरी यूनिट के माध्यम से बीमार पशुओं की जांच, उपचार और आवश्यक दवाए उपलब्ध कराई जा रही है.
पशु चिकित्सक डॉ. रोहित कुमार ने बताया कि सितंबर माह में मोबाइल यूनिट के माध्यम से प्रखंड क्षेत्र में 104 मवेशियों का इलाज किया गया. उन्होंने बताया कि लम्पी रोग, स्किन डिजीज, खुरहा-मुंचपका सहित पशुओं में होने वाली विभिन्न बीमारियों की सूचना मिलने पर टीम संबंधित गांव में पहुंचकर पशुओं की जांच और उपचार करती है.
सिर्फ एक कॉल पर मिल रही सुविधाएं
उन्होंने बताया कि पशुपालक किसी भी आपात स्थिति में 1962 हेल्पलाइन नंबर पर संपर्क कर सकते है.
सूचना मिलने के बाद आवश्यकता के अनुसार मोबाइल वेटरनरी यूनिट को संबंधित गांव भेजकर पशु का उपचार एवंदवा उपलब्ध कराई जाती है.
चिकित्सकों द्वारा पशुओं में बीमारी के लक्षणों की जांच के साथ पशुपालकों को खान-पान, रखरखाव और विभिन्न बीमारियों से बचाव के उपायों की जानकारी भी दी जाती है.
मोबाइल वेटरनरी यूनिट का मुख्य उद्देश्य पशुपालकों को समय पर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराकर बीमारी को गंभीर होने से पहले नियंत्रित करना है.
ग्रामीण पशुपालकों का कहना है कि गांव में ही चिकित्सक और उपचार की सुविधा मिलने से काफी सहूलियत हो रही है.
इससे समय और इलाज पर होने वाले खर्च की भी बचत हो रही है. गौरतलब है कि राज्य सरकार के निर्देश पर संचालित मोबाइल वेटस्नरी यूनिट की इमरजेंसी सेवा जारी है.
सितंबर में 104 मवेशियों का इलाज किया गया है. लम्पी रोग, स्किन डिजीज, खुरपका-मुंहपका सहित अन्य बीमारियों का उपचार हो रहा है.
1962 हेल्पलाइन नंबर पर संपर्क कर सकते हैं पशुपालक. जिससे गांव में ही मिल रही पशु चिकित्सा सुविधा से पशुपालकों को बड़ी राहत भी.
पशु चिकित्सक डॉ. रोहित कुमार ने बताया कि बीमार पशुओं की जांच, उपचार और दवा उपलब्ध कराई जा रही है.
पशुपालकों को खान-पान रखरखाव और बचाव के उपायों की जानकारी भी दी जाती है. हमारा उद्देश्य है कि बीमारी गंभीर होने से पहले ही नियंत्रित हो जाए.












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