Home मछली पालन Fisheries: हर साल 7 फीसद की तेजी से बढ़ रहा सीफूड एक्सपोर्ट, झींगा टॉप पर, अमेरिका है सबसे बड़ा बाजार
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Fisheries: हर साल 7 फीसद की तेजी से बढ़ रहा सीफूड एक्सपोर्ट, झींगा टॉप पर, अमेरिका है सबसे बड़ा बाजार

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प्रतीकात्मक तस्वीर.

नई दिल्ली. भारत के समुद्री खाद्य निर्यात में पिछले 11 वर्षों के दौरान औसतन सात फीसद की वार्षिक वृद्धि दर्ज की गई है, जो इस सेक्टर की मजबूत और निरंतर विकास को दर्शाती है. इस अवधि में समुद्री उत्पादों का निर्यात दोगुने से अधिक हो गया है, जो 2013–14 में 30 हजार 213 करोड़ से बढ़कर 2024–25 में 62 हजार 408 करोड़ हो गया. वहीं इस वृद्धि में प्रमुख योगदान झींगा निर्यात का रहा है, जिसका मूल्य 43 हजार 334 करोड़ रहा है. गौरतलब है कि अमेरिका जैसे देशों में भारतीय झींगे की काफी डिमांड है. इसलिए आने वाले वर्षों में ये आंकड़ा और बढ़ सकता है.

गौरतलब है कि भारत का समुद्री खाद्य निर्यात एक व्यापक और विविधतापूर्ण श्रेणी में फैला हुआ है, जिसमें 350 से अधिक प्रकार के उत्पाद लगभग 130 वैश्विक बाजारों में भेजे जाते हैं. अमेरिका सबसे बड़ा बाजार बना हुआ है, जहां 2024-25 में कुल एक्सपोर्ट मूल्य का 36.42 फीसद हिस्सा गया. इसके बाद चीन, यूरोपीय संघ, दक्षिण-पूर्व एशिया, जापान और मध्य-पूर्व का नंबर आता है, जबकि बाकी बाज़ारों का कुल हिस्सा लगभग 9 फीसद है.

यहां किया जा रहा है निवेश
कुछ चुनिंदा वस्तुओं पर अत्यधिक निर्भरता को कम करने और वैश्विक समुद्री खाद्य बाजारों में भारत की उपस्थिति को मजबूत करने के लिए सरकार निर्यात टोकरी के विविधीकरण पर सक्रिय रूप से काम कर रही है.

प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (पीएमएमएसवाई) के तहत, मत्स्य पालन विभाग पूरी मूल्य श्रृंखला में कई तरह के उपायों को बढ़ावा देता है.

जिनमें गुणवत्तापूर्ण मछली बीज उत्पादन, खारे पानी की जलीय कृषि का विस्तार और विविधीकरण, निर्यात-उन्मुख प्रजातियों को बढ़ावा, प्रौद्योगिकी अपनाना, रोग प्रबंधन, ट्रेसबिलिटी सिस्टम और क्षमता निर्माण शामिल हैं.

इसके अलावा, फसल कटाई के बाद के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने, निर्बाध कोल्ड चेन नेटवर्क, आधुनिक मछली पकड़ने के बंदरगाहों और मछली उतारने के केंद्रों के विकास में भी निवेश किया जा रहा है.

वहीं केंद्रीय मंत्री राजीव रंजन सिंह ने इस उपलब्धि पर बोलते बाजार और उत्पाद विविधीकरण की निरंतर आवश्यकता पर जोर दिया.

केंद्रीय मंत्री ने कड़े नियामकीय अनुपालन के महत्व को रेखांकित किया. जिसमें एंटीबायोटिक प्रतिबंधों का पालन और ट्रेसबिलिटी प्रणाली को मजबूत करना शामिल है.

विशेष आर्थिक क्षेत्र(ईईजेड) नियमों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि इस ढांचे को एक्सेस पास के माध्यम से लागू किया जा रहा है, जिसमें सहकारी समितियों को प्राथमिकता दी जा रही है ताकि समावेशी विकास को बढ़ावा मिल सके.

उन्होंने अंडमान और निकोबार द्वीप समूह, ईईजेड और खुले समुद्र से टूना जैसी उच्च मूल्य वाली प्रजातियों के निर्यात की संभावनाओं को रेखांकित किया.

वहीं बेहतर ऑनबोर्ड हैंडलिंग, मजबूत कोल्ड चेन अवसंरचना, बेहतर पैकेजिंग, मूल्य संवर्धन तथा फसल कटाई के बाद होने वाले नुकसान को कम करने और निर्यात तंत्र को मजबूत करने के लिए वैकल्पिक बाजारों की खोज पर बल दिया.

निर्यातकों से 1 लाख करोड़ के निर्यात लक्ष्य को हासिल करने की दिशा में कार्य करने और ओपन मार्केट दृष्टिकोण अपनाने का भी आग्रह किया गया.

उन्होंने आश्वासन दिया कि ईआईसी, एनसीडीसी, नाबार्ड और खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय जैसी संस्थाओं का पूरा सहयोग मिलेगा.

उन्होंने अंडमान और निकोबार द्वीप समूह में आयोजित निवेशक बैठक का भी उल्लेख किया, जिसके नतीजे में मत्स्य क्षेत्र को सुदृढ़ करने के लिए निवेश हुए हैं.

विशेष रूप से समुद्री केज कल्चर, मोती की खेती और गहरे समुद्र में मछली पकड़ने वाले जहाजों के क्षेत्रों में निवेश में तेजी आई है.

Written by
Livestock Animal News Team

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